मेरी तहरीर में - - -
क़ुरआन का अरबी से उर्दू तर्जुमा (ख़ालिस) मुसम्मी
''हकीमुल उम्मत हज़रत मौलाना अशरफ़ अली साहब थानवी''का है,
हदीसें सिर्फ ''बुख़ारी'' और ''मुस्लिम'' की नक्ल हैं,
और तबसरा ---- जीम. ''मोमिन'' का है.
''हकीमुल उम्मत हज़रत मौलाना अशरफ़ अली साहब थानवी''का है,
हदीसें सिर्फ ''बुख़ारी'' और ''मुस्लिम'' की नक्ल हैं,
और तबसरा ---- जीम. ''मोमिन'' का है.
नोट: क़ुरआन में (ब्रेकेट) में बयान किए गए अलफ़ाज़ बेईमान आलिमों के होते हैं,जो मफ़रूज़ा अल्लाह के उस्ताद और मददगार होते हैं और तफ़सीरें उनकी तिकड़म हैं और चूलें हैं.
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क़ुरआन सूरह बनी इस्राईल -१७
(क़िस्त 6)
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क़ुरआन सूरह बनी इस्राईल -१७
(क़िस्त 6)
अल्लाह की मुहम्मद से वार्तालाप - - -
''आप कह दीजिए कि अल्लाह तअला मेरे और तुम्हारे दरमियान काफ़ी गवाह है वह अपने बन्दों को खूब जनता है, खूब देखता है और जिसको वह बेराह करदे तो उसको ख़ुदा के सिवा आप किसी को भी उन का मददगार न पाओगे. और हम क़यामत के रोज़ ऐसों को अँधा, गूंगा, बहरा बना कर मुँह के बल चला देंगे. ऐसों का ठिकाना दोजख़ है, वह जब ज़रा धीमी होने लगेगी, तब ही इन के लिए और ज़्यादः भड़का देंगे. यह है उनकी सज़ा इस लिए कि इन्हों ने हमारी आयतों का इंकार किया.''
सूरह बनी इस्राईल -१७, पारा-१५ आयत (९७-९८)
मुहम्मद ने अपने झूट को सच साबित करने के लिए अपने मुअय्यन और मुक़र्रर किए हुए अल्लाह को गवाह बनाया है,
पूछा जा सकता है उस अल्लाह का गवाह कौन है?
वह है भी या नहीं?
देखिए कि वह अपने अल्लाह को कौन सा रूप देकर बन्दों लिए स्थापित करते हैं कि वह ख़ुद मासूम बन्दों को गुमराह करता है,
उनको अँधा,गूंगा और बहरा बना देता है फिर मुँह के बल चलाता है .
एक सहाबा हसन बिन मालिक से हदीस है कि कोई अरबी इस आयत पर चुटकी लेते हुए मोहम्मद से पूछता है,
''या रसूल्लिल्लाह क़यामत के दिन काफिरों को यह मुँह के बल चलाना क्या होता है? मुहम्मद फ़रमाते हैं जो अल्लाह पैरों के बल से इंसान को चला सकता है वह क्या मुँह के बल चलाने की कुदरत नहीं रखता?
(सही मुस्लिम शरअ नवी)
पूछने वाले का सवाल, जवाब तलब इसके बाद भी है कि कैसे?
मगर किसी को मजाल न थी कि इस जवाब पर दोबारा सवाल करता,
क्यूंकि उस वक़्त हज़रत बज़रिए मार काट और लूट पाट के, उरूज पर आ चुके थे.
शायद इसी बात पर किसी ने झुंझलाहट में कहा कि
"फ़रिश्ते अपने पिछवाड़े से घोडा खोल सकते हैं."
ग़ौर तलब है कि मोहम्मदी अल्लाह कितना कुरूर और कितना ज़ालिम है,
कि दुन्या का संचारण छोड़ कर दोज़ख की भाड़ झोंकता रहता है
सिर्फ़ इस बात पर कि नोहम्मद की गढ़ी हुई आयतों को बन्दों ने मानने से इंकार किया.
किन बुनयादों पर मुसलमानों का अक़ीदा खड़ा है?
वह सोचते नहीं बल्कि जो सोचे उसकी माँ बहेन तौलने लगते है.
(पाँच आयातों में फिर मूसा और बनी इस्राईल का बेतुका हवाला है)
''और क़ुरआन में हमने जा बजा फ़ासला (वक़्फ़ा) रखा है ताकि आप लोगों के सामने ठहर ठहर कर पढ़ें और हम ने इसको उतारने में भी, तजरीदन (दर्जा बदर्जा) उतारा है. आप कह दीजिए कि तुम इस क़ुरआन पर ईमान लाओ या ईमान न लाओ जिन लोगों को इससे पहले दीन का इल्म दिया गया था ये जब उनके सामने पढ़ा जाता है तो वह ठुडडियों के बल सजदे में गिर पड़ते हैं और कहते हैं कि हमारा रब पाक है, बेशक हमारे रब का वादा ज़रूर पूरा ही होगा. और ठुडडियों के बल गिरते हैं, रोते हैं और ये उनका खुशु बढ़ा देता है. आप कह दीजिए ख़्वाह आप अल्लाह कह कर पुकारो या रहमान कह कर पुकारो सो इसके बहुत अच्छे नाम हैं और अपनी नमाज़ में न बहुत पुकार कर पढ़िए और न बिलकुल चुपके चुपके ही पढ़िए, और दोनों के दरमियान एक तरीक़ा अख़्तियार कर लीजिए.''
सूरह बनी इस्राईल -१७, पारा-१५ आयत (१०६-१०९)
क़ुरआन को पढ़ने का तरीक़ा सलीक़ा भी बतला दिया गया है जोकि ट्रेनिग द्वारा आज भी पाठक को बतलाई जाती है,
इसी क़ुरआन के गुणगान और कर्म कांड में ही मुसलमानों का वक़्त कटता है. मुहम्मद इसकी पब्लिसिटी करते हैं कि लोग इसे पढ़ कर मदहोश हो जाते हैं और इसका ख़ुमार ऐसा उन पर होता है कि ठुडडियों के बल गिर गिर पड़ते हैं.
आप समझ सकते हैं कि मोहम्मद किस कद्र झूठे और मक्र आलूद थे.
***
मेरे भाइयो,
बहनों !
मेरे बुजुगो!!
नौ जवानों!!!
मेरे मिशन को समझने की कोशिश करो. मैं आप में से ही एक बेदार फ़र्द हूँ जो आने वाले वक़्त की भनक पा चुका है कि अगर तुम न जगे तो पामाल हो जाओगे.
मैं कहाँ तुमको गुमराह कर रहा हूँ ?
तुम तो पहले से ही गुमराह हो,
मैं तो तुम से ज़रा सी तब्दीली की बात कह रह हूँ कि
मुस्लिम से मोमिन बन जाओ,
सब कुछ तुम्हारा जहाँ का तहाँ रहेगा,
बस बदल जाएगा सोचने का ढंग.
जब तुम मोमिन हो जाओगे तो तुम्हारे पीछे तुम्हारी तक़लीद में होंगे ग़ैर मुस्लिम भी.
और इस तरह एक पाकीज़ा क़ौम वजूद में आएगी,
जिसको ज़माना सर उठा कर देखेगा कि यह मोमिन है,
पार दर्शी है,
अनोखा है.
सिकंदर दुन्या को फ़तह करते करते फ़ना हो गया,
हिटलर ग़ालिब होते होते मग़लूब हो गया,
इस्लाम अब इसी मुक़ाम पर आ पहुंचा है,
अल्लाह के नाम पर मुहम्मद ने इंसानियत को बहुत नुक़सान पहुँचाया है,
उसका ख़ामयाज़ा आज एक बड़ा मानव समाज और पूरी दुन्या में भुगत रहा है,
जो तुम्हारी आँखों के सामने है.
यह गुनह गार ओलिमा और उनके एजेंट ग़लत प्रोपेगंडा करते हैं
कि इस्लाम योरोप और अमरीका में मक़बूल हो रहा है,
यह इनकी रोटी रोज़ी का मामला है जिसके वह वफ़ा दार हैं
मगर तुम्हारे लिए वह ग़द्दार हैं.
भूल कर मज़हब बदल कर हिन्दू, ईसाई या बहाई मत बन जाना,
यह चूहेदानों की अदला बदली है.
मज़हबी कट्टरता ही चूहे दान होती है.
मेरे जज़बा ए मोमिन को समझो.
मोमिन का दीन ही तुम्हारा दीन होगा.
आने वाले कल में मोमिन ही सुर्ख़रू होंगे.
जीम 'मोमिन' निसारुल-ईमान
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