तालीम से गाफ़िल,फ़ने-ओन्का से अलग,
बदहाली में अव्वल, सफ़े-आला से अलग,
गुमराह किए है इन्हें अल्लाह 'मोमिन',
दुन्या है मुसलमानों की दुन्या से अलग
The Hidden Truth.
Wednesday, 30 September 2020
ख़ुशबू ए इंसानियत
Tuesday, 29 September 2020
मुस्लिमो के लिए बेवा और तलाक़ शुदा
Monday, 28 September 2020
Sunday, 27 September 2020
अनचाहा सच
Saturday, 26 September 2020
मानव की मुक्ति
Friday, 25 September 2020
मनु वाद का ज़हर ---(2)
Thursday, 24 September 2020
मनु वाद का ज़हर ---(1)
Wednesday, 23 September 2020
देश प्रेम
Tuesday, 22 September 2020
पृथ्वीराज चौहान
Monday, 21 September 2020
राम नाम सत्य है
Sunday, 20 September 2020
हिन्दू का अस्ल ?
Saturday, 19 September 2020
धर्म बाद में, धार्मिकता पहले
Friday, 18 September 2020
दीवालिए लोग
Thursday, 17 September 2020
सच्चाई सर्व श्रेष्ट आधार, सत्य मेव जयते !
Wednesday, 16 September 2020
कुन फ़या कून होजा, हो गया
Tuesday, 15 September 2020
कल्पनाओं की कथा और जन मानस की आस्था
Monday, 14 September 2020
भोगना और सम्भोगना
Sunday, 13 September 2020
वास्तविकता है ईमान
मुझे भाषा ज्ञान बहुत कम है मगर जो चेतन शक्ति है वह आ टिकती है
"तिक"
इस तिक का तुकांत अगर स्वा से जोड़ दिया जाए तो स्वास्तिक बनता है,
यह दुन्या का बड़ा चर्चित शब्द बनता है.
हिन्दू, बौध, जैन, आर्यन और नाज़ियों में इसका चिन्ह बहुत शुभ माना जाता है.
इसकी जड़ें बहुत गहरी हैं,
इसका बीज ज़रूर कहीं पर मानव सभ्यता में बोया गया है.
स्वास्तिक में वस्तु, वास्तव और वास्तविकता का पूरा पूरा असर है.
शब्द वास्तव बहुत महत्त्व पूर्ण अर्थ रखता है
जोकि धर्म के हर हर पहलू पर सवालिया निशान बन कर खड़ा हो जाता है.
इस वास्तव को धर्मों ने धर्मी करण करके इस का लाभ अनुचित उठाया और
अर्थ का अनर्थ कर दिया है,
अपने ग्रन्थों में इसे चस्पा कर कर दिया,
इसकी बातों पर चलने वालों को आस्तिक
और इसे न मानने वाले को नास्तिक ठहरा दिया है .
फिर भी यह शब्द वास्तव अपना प्रताप लिए धर्मों की दुन्या में डटा हुवा है.
इसी तरह अरबी ज़बान में एक शब्द है
"ईमान"
इस पर इस्लाम ने बिलजब्र ऐसा क़ब्ज़ा किया कि ईमान,
इस्लाम का पर्याय बन कर रह गया है.
लोग अकसर मुझे हिक़ारत के साथ नास्तिक कह देते है,
उनके परिवेश को मद्दे नज़र रखते हुए मैं 'हाँ' भी कह देता हूँ.
यही नहीं मैं उनको समझाने के लिए ख़ुद को नास्तिक कह देता हूँ.
ख़ुद को मुल्हिद या दहरया कह देता हूँ जोकि सामान्यता घृणा सूचक माना जाता है.
इन अपमान सूचक शब्दों वास्तविक अर्थ - - -
नास्तिक (वेदों पर आस्था न रखने वाला)
मुल्हिद, (अनेश्वर वादी)
दहरया (दुन्या दार)
उम्मी (हीब्रू भाषा का ज्ञान न रखने वाला)
अजमी=गूंगा (अरबी जबान न जानने वाला, अरबी इन्हें गूंगा कहते हैं.
धर्मों ने इन शब्दों को घृणा का प्रतीक बना कर अपनी दूकाने चलाई है.
इन शब्दों पर ग़ौर करे सभी अपना बुनयादी स्वरूप रखते हैं.
मगर धूर्त धार्मिकता इन्हें नकारात्मक बना देती है.
ईमान बड़ा मुक़द्दस लफ़्ज़ है - - -
लौकिक, स्वाभाविक और क़ुदरती सच्चाई रखने वाली बात ईमान है.
न कि इन्सान हवा में उडता हो और पशु इंसानी ज़बान में वार्तालाप करता हो.
ईमान का ही हम पल्ला लफ्ज़ स्वास्तिक है.
स्वाभाविक बातें ही सच होती हैं.
अस्वाभाविक और ग़ैर फ़ितरी बातें धर्मों के बतोले होते हैं.
इसी तरह से मानव कर्म भी सार्थक और निरर्थक होते हैं .
धरती पर हल चलाकर अन्न उपजाना सार्थक काम है,
भूमि पूजन निरर्थक काम होता है.
अधिकांश दुन्या इन्ही वास्तविकता और ईमान को कनारे करके
निरर्थकता और बे ईमानी पर सवार है .
Saturday, 12 September 2020
राम नाम
राम नाम
ISIS और दूसरी इस्लामी तंज़ीमों के मानव समाज पर ज़ुल्म व् सितम देख कर बजरंग दल को हिंदुत्व का जोश आया कि वह भी इन की नक़्ल में प्रतीक आत्मक मुज़ाहिरा करें, कि वह भी उनकी तरह मानवता के, ख़ास कर मुसलमानों के दुश्मन हो सकते है.
हालांकि इनका प्रदर्शन राम लीला के लीला जैसा हास्य स्पद है.
मदारियों की शोब्दा बाज़ी की तरह.
बजरंग दल का कमांडर अकसर स्वर्ण होता है, बाक़ी फ़ौजी दलित और ग़रीब होते हैं.
वह स्वर्ण इन दलितों को पूर्व तथा कथित वानर सेना आज तक बनाने में सफल है.
वह इन्हीं में से एक को दास्ता के प्रतीक हनुमान बना देते हैं
जो अपना सीना चीर कर दलितों को दिखलाता है कि उसके भीतर छत्रीय राम का वास है.
विनय कटिहार, कल्याण सिंह, राम विलास पासवान और उदिति नारायण जैसे सुविधा भोगी हर समाज में देखे जा सकते हैं. यह मौजूदा मनुवाद के दास हनुमान हैं .
12% मनुवादियों ने बाक़ी मानव जाति को राक्षस, पिशाच, वानर, शुद्र, अछूत जैसे नाम देकर इनके साथ अमानवीय बर्ताव किया है.
इन्हीं में से जिन लोगों ने दासता स्वीकार करके इनके अत्याचार में शाना बशाना हुए और इनके लिए अपनी जान आगे कर दिया,
उनको हनुमान बना कर उनकी बिरादरी के लिए पूजनीय बना दिया .
राम के आगे हाथ जोड़ कर घुटने टेके हनुमान देखे जा सकते हैं.
शूर वीरों के लिए, इनकी दूसरी तस्वीर होती है
सीना फाड़ कर राम सीता की,
जो आस्था और प्रेम को दर्शाती है,
उनके दास साथियों के लिए .
यही नहीं मौक़ा पड़ने पर यह ब्रह्मण भी हनुमान पूजा में शामिल हो जाते हैं मगर उनको अपने घाट पर पानी के लिए फटकने नहीं देते.
किस क़दर धूर्तता होती है इनके दिमाग़ में.
जहाँ मजबूर होकर यह दमित सर उठाते हैं,
तो मनुवाद इनको माओ वादी या नक्सली कह कर दमन करते है.
दमितों के सब से बड़े दुश्मन यही मुसलसल बनाए जाने वाले हनुमान होते हैं.
यह अपने ताक़त का प्रदर्शन कभी मुसलमानों पर करते हैं तो कभी ईसाइयों पर जोकि अस्ल में दलित और दमित ही होते हैं
मगर मनुवाद से छुटकारा लेकर धर्म बदल लेते है .
कितनी मज़बूत घेरा बंदी है, मनुवाद की .
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Friday, 11 September 2020
मैसुलेनिअस mussolinians
वह हिटलर को हक़ बजानिब कहते हैं मगर तारीख़ के आईने में वह मुजरिम ही है.
हिटलर को इस कशमकश में भूला जा सकता है
मगर मसुलीनी (mussolini) को कभी नहीं,
जिसकी लाश पर जर्मन अवाम ने 24 घंटे थूका था.
भारत में मनुवाद नाज़ियों की ही समानांतर व्यवस्था है.
ट्रेन में अयोध्या के तीर्थयात्री stove पर खाना बनाने की ग़लती के कारण
हादसे का शिकार हो गए, उनको किसी मुसलमान ने आग के हवाले नहीं किया था. मनुवादियों ने इस दुरघटना को रूपांतरित करके मुसलामानों को शिकार बनाया, जान व माल का ऐसा तांडव किया कि हादसा इतिसास का एक बाब बन गया.
मुंबई में पाकिस्तानी आतंकियों के हमले को मनुवादियों ने,
इस तरह मौक़े का फ़ायदा उठाया कि पोलिस अफ़सर करकरे को मरवा दिया जो एक ईमान दार अफ़सर था और हिन्दू आतंकियों की घेरा बंदी किए हुए था, उसको भितर घात करके अपनी एडी का गूं पाक आतंक वादियों की एडी में लगा दिया. इन मनुवादी आतंकियों के विरोध में किसी को बोलने की हिम्मत न थी.
सूरते-हाल ही कुछ ऐसी थी.
मुज़फ्फर नगर में हिन्दू आतंक फैला कर जनता में धुरुवीय करण करने में,
यह मनुवादी कामयाब रहे.
उनहोंने एलानिया अल्प संख्यकों के सामने अपने ताण्डव का एक नमूना पेश किया.
मुज़फ़्फ़र नगर के शरणार्थी मुस्लिम आबादी कैराना में शरण गत हुए तो,
मनुवादियों को नया शोशा मिल गया कि कैराना में मुस्लिम जिहादी सर गर्म हैं,
उनके आतंक से हिन्दू पलायन कर रहे है,
कश्मीर की तरह. 62% की हिन्दू आबादी 8% रह गई है.
यह mussolinian जनता के Vote को कैसे मोड़ते हैं, खुली हुई किताब है.
उनकी मजबूरी यह है कि देश में जमहूरियत आ गई है,
वरना इनका पाँच हज़ार साला वैदिक काल की तस्वीर देखी जा सकती है.
Thursday, 10 September 2020
पाप और महा पाप है.
Wednesday, 9 September 2020
अंतर राष्ट्रीय मानक
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अंतर राष्ट्रीय मानक
कल TV पर साधुओं और महंतों की भीड़ थी.
एक महाराज ऐनकर के सवालों के जवाब में कह रहे थे
राम का जन्म एक लाख इक्यासी हज़ार छे सौ इकसठ वर्ष पूर्व,
इसी स्थान पर हुवा था जहाँ राम लला आज विराज मान है.
झूट और इतना ला कल्कुलेड़ेट ?
यह झूटे लोग चश्मदीद गवाह की तरह बातें करते हैं,
इनको इतना भी नहीं पता कि सिर्फ़ पांच हज़ार साल पहले
लोहे का वजूद साकार हुवा था.
इस क़िस्म की बातें इन महा पुरुषों का पूरा समूह कर रहा था ,
साथ में स्त्रीयाँ माहौल को नारे लगा कर राम मय कर रही थीं.
तबला सारंगी लिए गायक भी लोगों को सम्मोहित कर रहे थे.
झूट का इतना विशाल बोल बाला ?
क्या हिन्दू मानस इस युग में पाताल की तरफ़ जा रहा है ?
अंतर राष्ट्रीय सर्वे के मुताबिक नार्वे,स्वीडन को पछाड़ते हुए
दुन्या का न. 1 देश बन गया है
जो मानवता के शिखर विन्दु पर है.
मानवता का शिखर विन्दु सिर्फ़ सत्य और तथ्य आधारित होता है.
स्वीडन दूसरे न. पर है,
पाकिस्तान का न. 92 है,
और भारत का 118 वाँ पायदान है.
शर्म आती है भारतीय होने पर.
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Tuesday, 8 September 2020
सर मग़ज़ी
हिन्दू के लिए मैं इक, मुस्लिम ही हूँ आख़िर ,
मुस्लिम ये समझते हैं, ग़ुमराह है काफ़िर ,
इंसान भी होते हैं, कुछ लोग जहाँ में ,
ग़फ़लत में हैं यह दोनों, समझाएगा 'मुंकिर' .
मैं सभी धर्मों को इंसानियत का दुश्मन समझता हूँ.
परंपरा गत जीवन बिताते रहने के पक्ष में तो बिलकुल नहीं.
दुन्या बहुत तेज़ी से आगे जा रही है,
कहीं ऐसा न हो कि हम परम्परा की घाटियों में घुट कर मर जाएं.
धर्मों में जो अच्छाइया है, वह वैश्विक सच्चाइयों की देन है, उनकी अपनी नहीं.
मुसलमान हिन्दुओं से बेहतर इंसान होते है,
इस बारे में मैं विस्तार के साथ पहले भी लिख चुका हूँ.
आज भी हर रोज़ सैकड़ों हिन्दू अपने धर्म की ख़राबियों के कारण ,
उसे त्याग के इस्लाम क़ुबूल कर रहा है और कि मुसलमान अपनी जगह पर क़ायम है. वह हिन्दू धर्म को स्वीकार ही नहीं कर सकता.
कुछ पाठक मुझे हज़्म नहीं कर पा रहें और उल्टियाँ कर रहे हैं.
कुछ आलोचक कहते हैं कि में हिन्दू धर्म की गहराइयों तक पहुँच नहीं पाया,
मनुवाद पर खड़ा हिन्दू धर्म कहाँ कोई गहराई रखता है ?
पांच हज़ार सालों से देख रहा हूँ, इस धर्म के कर्म को.
स्वर्ण आर्यन ने भारत के मूल्य निवासी को किस तरह से शुद्रित किया है ,
शूद्रों को अपने नहाने के तालाब में पानी भी नहीं पीने देते थे,
औरतो को अपनी छातियाँ खुली रखने का आदेश हुवा करते थे,
शूद्रों को अपने कमर में झाड़ू बांध रखने के फ़रमान थे कि
वह अपने मनहूस पद चिन्हों को मिटते हुए चलें.
ख़ुद हिन्दू लेखक अपने धर्म की धज्जियाँ उड़ाते हुए देखे जाते हैं,
अपने आराध्य का मज़ाक़ बनाते हैं,
मुझे राय देना फुजूल है कि मैं इसमें सुगंध तलाशूँ..
मैं अब तक इस बात का पाबंद रहा कि सिर्फ़ मुसलमानों को जागृत करूँ,
अंतर आत्मा की आवाज़ आई कि नहीं यह भेद भाव होगा.
मुझे इस बात का खौ़फ़ नहीं रह गया है कि कोई हिन्दू मुझे मार दे या मुसलमान.
मौत तो एक ही होगी, कातिल चाहे जितने हों.
Monday, 7 September 2020
ज्ञान
मेरे दोस्त गण कभी कभी मुझे अज्ञानी होने की उलाहना देते हैं
और मुझे अधकचरे ज्ञान होने का ताना देते है.
मैं ज्ञान की भूल भुलय्या से निकल चुका हूँ.
जहाँ तक समझ चुका हूँ कि सत्य को किसी ज्ञान की ज़रुरत नहीं.
सत्य का ज्ञान से कोई संबंध नहीं.
मैंने पाया है बड़े से बड़ी असत्य को सत्य साबित करने वाले महा ज्ञानी होते हैं. बाइबिल तौरेत क़ुरान गीता वेद और दूसरे ग्रंथ इसके साक्षी हैं,
महा मूरख श्रद्धालु इनके शिकार हैं.
सत्य की राह ही हमको हमारे माहौल को, हमारे समाज को और हमारे देश को सम्पूर्णता पथ प्रदर्शित कर सकती है.
"सत्य बोलो मुक्ति है" के बोल मुर्दों के लिए अनुचित है,
"सत्य बोलो मुक्ति है" जिन्दों को हर सांस में सम्लित करने की ज़रुरत है.
कडुवा सत्य मीठा हो जाएगा.
Sunday, 6 September 2020
आधीनता
अगर इंसान किसी अल्लाह, गाड और भगवान् को नहीं मानता तो सवाल उठता है कि वह इबादत और आराधना किसकी करे ?मख़लूक़ फ़ितरी तौर पर किसी न किसी की आधीन रहना चाहती है.एक चींटी अपने रानी के आधीन होती है,तो एक हाथी अपने झुण्ड के सरदार हाथी या पीलवान का अधीन होता है.कुत्ते अपने मालिक की सर परस्ती चाहते है,तो परिंदे अपने जोड़े पर मर मिटते हैं.इंसान की क्या बात है, उसकी हांड़ी तो भेजे से भरी हुई है, हर वक्त मंडलाया करती है, नेकियों और बदियों का शिकार किया करती है.शिकार, शिकार और हर वक़्त शिकार,इंसान अपने वजूद को ग़ालिब करने की उडान में हर वक़्त दौड़ का खिलाडी बना रहता है, मगर बुलंदियों को छूने के बाद भी वह किसी की अधीनता चाहता है.सूफ़ी तबरेज़ अल्लाह की तलाश में इतने ग़र्क़ हो गएकि उसको अपनी ज़ात के आलावा कुछ न दिखा,उसने अनल हक़ (मैं ख़ुदा हूँ) की सदा लगाईं,इस्लामी शाशन ने उसे टुकड़े टुकड़े कर के दरिया में बहा देने की सज़ा दी.कुछ ऐसा ही गौतम के साथ हुवा कि उसने भी भगवन की अंतिम तलाश में ख़ुद को पाया और
" आप्पो दीपो भवः " का नारा दिया.
मैं भी किसी के आधीन होने के लिए बेताब था,ख़ुदा की शक्ल में मुझे सच्चाई मिली और मैंने सदाक़त मे जाकर पनाह ली.कानपूर के 92 के दंगे में, मछरिया की हरी बिल्डिंग मुस्लिम परिवार की थी,दंगाइयों ने उसके निवासियों को चुन चुन कर मारा,मगर दो बन्दे उनको न मिल सके, जिनको कि उन्हें ख़ास कर तलाश थी.पड़ोस में एक हिन्दू बूढ़ी औरत रहती थी,भीड़ ने कहा इस के घर में ये दोनों शरण लिए हुए होंगे,घर की तलाशी लो.बूढी औरत अपने घर की मर्यादा को ढाल बना कर दरवाज़े खड़ी हो गई.उसने कहा कि मजाल है मेरे जीते जी मेरे घर में कोई घुस जाए, रह गई अन्दर कोई मुसलमान हैं ?तो मैं ये गंगा जलि सर पर रख कर कहती हूँ किमेरे घर में कोई मुसलमान नहीं है.औरत ने झूटी क़सम खाई थी, दोनों व्यक्ति घर के अन्दर ही थे, जिनको उसने मिलेट्री आने पर उसके हवाले किया.ऐसे झूट का भी मैं अधीन हूँ.