Monday, 16 October 2017

Quraan ke jhoot aur taureti sadaqa 16

मेरी तहरीर में - - -
क़ुरआन का अरबी से उर्दू तर्जुमा (ख़ालिस) मुसम्मी
''हकीमुल उम्मत हज़रत मौलाना अशरफ़ अली साहब थानवी''का है,
हदीसें सिर्फ ''बुख़ारी'' और ''मुस्लिम'' की नक्ल हैं,
और तबसरा ---- जीम. ''मोमिन'' का है।
नोट: क़ुरआन में (ब्रेकेट) में बयान किए गए अलफ़ाज़ बेईमान आलिमों के होते हैं,जो मफ़रूज़ा अल्लाह के उस्ताद और मददगार होते हैं और तफ़सीरें उनकी तिकड़म हैं और चूलें हैं.
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क़ुरआन के झूट - - - और तौरेती सदाक़त  
क़ुरआन में कई अच्छी और कई बुरी हस्तियों का नाम बार बार आता है , जिसमे उनका ज़िक्र बहुत मुख़्तसर होता है। पाठक की जिज्ञासा उनके बारे में बनी रहती है कि वह उनकी तफ्सील जानें।  मुहम्मद ने इन हुक्मरानों का नाम भर सुना था और उनको पैग़म्बर या शैतान का दरजा देकर आगे बढ़ जाते हैं , उनका नाम लेकर उसके साथ मन गढ़ंत लगा कर क़ुरआन पढ़ने वालों को गुमराह करते हैं। दर अस्ल यह तमाम हस्तियां यहूद हैं जिनका  विवरण तौरेत में आया है, मैं उनकी हक़ीक़त बतलाता हूँ , इससे मुहम्मदी अल्लाह की जिहालत का इन्किशाफ़ होता है। 

सुलेमान 
दाऊद ने अपनी ज़िन्दगी में ही अपनी चहीती बीवी बतशीबा के बेटे सुलेमान को बादशाह बना दिया था। इसके दीगर सरकश बेटे सुलेमान के खिलाफ थे। सारे मुल्क में अम्न का क़याम हो चुका था और सुलेमान को भरी- पुरी विरासत मिली थी जिसे उसने एक लायक जा नशीन की तरह संवारा और सजाया ही नहीं बल्कि बढ़ाया भी।  सुलेमान ने मिस्री फ़िरअना (बादशाह) की बेटी से शादी की। उसके बाद मुख़तलिफ़ मुमालिक , मज़ाहिब और क़बाइल् से बीवियाँ करके हरम की रौनक़ बढाता रहा।  इसके हरम में सात सौ रानियां और तीन सौ पट-रानियाँ थीं। 
सुलेमान हर एक के मज़हब का एहतराम करता था और उन पर चलता भी था। इसका बाप दाऊद ज़िन्दगी भर जंगों में उलझा रहा , उसने सल्तनत तो बनाई मगर उसके लिए कुछ भला न कर सका। दाऊद की ख़्वाहिश थी कि वह कोई बड़ी इबादत गाह बनवाए मगर बनवा न सका जिसे उसके बेटे सुलेमान ने पूरी की। दाऊद के ज़माने में ऊँचे टीले पर बेदी बनाई जाती थी और उस पर जाकर जानवरों की बलि देकर दुआएं मांगी जाती थी। यही तरीका उसके पूर्वज नूह , मूसा और दाऊद का भी हुवा करता था , भारत में भी ऐसा ही था। 
सुलेमान ने एक आलिशान इबादत गाह योरोसलम में बनवाई जिसके खंडहरों में दीवार गिरया आज भी क़ायम है। सुलेमान ने अपने लिए एक शानदार महल भी बनवाया था जिसमें पीतल के खम्बे और हौज़ हुवा करते थे और सोने की नक़्क़ाशी हुवा करती थी। 
सुलेमान के महल की शोहरत दूर दूर तक थी। 
सुलेमान बहुत ही ज़हीन इंसान था। वह माहिर ए नबातात (बनस्पति) और जीवों जानवरों पर शोध करता था। सारे राज काज के कामों में काफी पकड़ रखने वाला था। उसकी शोहरत सुनकर शीबा की रानी बिलक़ीस सुलेमान की मेहमानी में आई थी जो अपने साथ ऊंटों पर लाद कर तोहफे लाइ थी और दस दिनों तक सुलेमान की मेहमान रही।  सुलेमान भी उसको तोहफे तहायफ़ दिए। 
(क़ुरआन सुलेमान और बिलकीस की शर्मनाक कहानी गढ़े हुए है) 

सुलेमान की रानियों में मुआबी , अम्मोनी , सुदीदनी , हित्ती और मिस्री औरतें थीं जो अपने अपने अक़ायद के लिए आज़ाद थीं जिसे योवहा (खुदा) पसंद नहीं करता था , इसकी वजह से सुलेमान ज़वाल पिज़ीर (पतन) हुवा। सुलेमान ने योरोसलम को राजधानी बना कर चालीस साल तक हुकूमत की। उसने एक बड़ा इस्राईली साम्राज्य क़ायम किया। मूसा के ४८० सालों बाद सुलेमान हुक्मराँ हुवा यानी आज से तक़रीबन ३००० साल पहले। 
सुलेमान दानिश्वर होने के साथ साथ एक शायर भी था। इसकी रचनाएँ लगभग ३००० हैं , इनके आलावा १००० गीत लिखे। इन्ही को क़ुरआन ज़ुबूर कहता है और कहता है अल्लाह ने इसे उठा लिया।  
एक कामयाब और होनहार बादशाह सुलेमान। 

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जीम 'मोमिन' निसारुल-ईमान

Saturday, 14 October 2017

Hindu Dharm Darshan 102



गीता और क़ुरआन

भगवान् कृष्ण कहते हैं - - -
>सारे प्राणियों का उद्गम इन दोनों शक्तियों में है . 
इस जगत में जो भी भौतिक तथा आध्यात्मिक है, 
उनकी उत्पत्ति तथा प्रलय मुझे ही जानो.
**हे धनञ्जय ! 
मुझ से श्रेष्ट कोई शक्ति नहीं. 
जिस प्रकार मोती धागे में गुंधे रहते हैं, 
उसी प्रकार सब कुछ मुझ पर ही आश्रित है.
श्रीमद् भगवद् गीता अध्याय  -7  - श्लोक -6-7 
>उफ़ ! 
हिन्दू समाज के लिए ब्रह्माण्ड से बड़ा झूट ? 
कोई शख्स खुद को इस स्वयम्भुवता के साथ पेश कर सकता है ? 
तमाम भगवानों, खुदाओं और Gods इस वासुदेव के सपूत से कोसों दूर रह गए. कृष्ण जी जो भी हों, जैसे रहे हों, उनसे मेरा कोई संकेत नहीं. 
मेरा सरोकार है तो गीता के रचैता से 
कि अतिश्योक्ति की भी कोई सीमा होती है. 
चलिए माना कि शायरों और कवियों की कोई सीमा नहीं होती 
मगर अदालतों के सामने जाकर अपना सर पीटूं ? 
कि ऐसी काव्य संग्रह पर हाथ रखवा कर तू मुजरिमों से हलफ़ उठवाती है ? 
ऐसा लगता है जिस किसी ने गीता या क़ुरान को कभी कुछ समाज लिया होगा, वह इनकी झूटी कसमें खाने में कभी देर नहीं करेगा. 
क्या गीता और क़ुरान वजह है कि हमारी न्याय व्यवस्था दुन्या में भ्रष्टतम है. भ्रष्ट कौमों में हम नं 1 हैं. 
हमारे कानून छूट देते है कि सौ की आबादी वाले देश की आर्थिक अवस्था १०० रुपए हैं , जो न्याय का चक्कर लगते हुए ९० रुपए दस लोगों के पास पहुँच जाए और 10 रुपए ९० के बीच बचें ? जिसका हक एक रुपया होता हो, उसके पास एक पैसा बचे ? वह अगर इस व्यवस्था के खिलाफ आवाज़ उठाए तो उसे देश द्रोही कहा जाए ? नकसली कहकर गोली मार दी जाए ?

और क़ुरआन कहता है - - - 
>"यह सब अहकाम मज़्कूरह खुदा वंदी जाब्ते हैं 
और जो शख्स अल्लाह और रसूल की पूरी इताअत करेगा 
अल्लाह उसको ऐसी बहिश्तों में दाखिल करेगा 
जिसके नीचे नहरें जारी होंगी. हमेशा हमेशा उसमें रहेंगे, 
यह बड़ी कामयाबी है."
सूरह निसाँअ4 पाँचवाँ पारा- आयात (८-१३)
यह आयत कुरान में बार बार दोहराई गई है. अरब की भूखी प्यासी सर ज़मीन के किए पानी की नहरें वह भी मकानों के बीचे पुर कशिश हो सकती हैं मगर बाकी दुन्या के लिए यह जन्नत जहन्नम जैसी हो सकती है. 
मुहम्मद अल्लाह के पैगाबर होने का दावा करते हैं और अल्लाह के बन्दों को झूटी लालच देते हैं. अल्लाह के बन्दे इस इक्कीसवीं सदी में इस पर भरोसा करते हैं. 
अल्लाह के कानूनी जाब्ते अलग ही हैं कि उसका कोई कानून ही नहीं है.


जीम 'मोमिन' निसारुल-ईमान

Friday, 13 October 2017

Quraan ke jhoot aur taureti sadaqa 15

मेरी तहरीर में - - -
क़ुरआन का अरबी से उर्दू तर्जुमा (ख़ालिस) मुसम्मी
''हकीमुल उम्मत हज़रत मौलाना अशरफ़ अली साहब थानवी''का है,
हदीसें सिर्फ ''बुख़ारी'' और ''मुस्लिम'' की नक्ल हैं,
और तबसरा ---- जीम. ''मोमिन'' का है।
नोट: क़ुरआन में (ब्रेकेट) में बयान किए गए अलफ़ाज़ बेईमान आलिमों के होते हैं,जो मफ़रूज़ा अल्लाह के उस्ताद और मददगार होते हैं और तफ़सीरें उनकी तिकड़म हैं और चूलें हैं.
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क़ुरआन में कई अच्छी और कई बुरी हस्तियों का नाम बार बार आता है , जिसमे उनका ज़िक्र बहुत मुख़्तसर होता है। पाठक की जिज्ञासा उनके बारे में बनी रहती है कि वह उनकी तफ्सील जानें।  मुहम्मद ने इन हुक्मरानों का नाम भर सुना था और उनको पैग़म्बर या शैतान का दरजा देकर आगे बढ़ जाते हैं , उनका नाम लेकर उसके साथ मन गढ़ंत लगा कर क़ुरआन पढ़ने वालों को गुमराह करते हैं। दर अस्ल यह तमाम हस्तियां यहूद हैं जिनका  विवरण तौरेत में आया है, मैं उनकी हक़ीक़त बतलाता हूँ , इससे मुहम्मदी अल्लाह की जिहालत का इन्किशाफ़ होता है। 
क़ुरआन के झूट - - - और तौरेती सदाक़त  

दाऊद 
दाऊद एक चरवाहा था जो अपने आठ भाइयों में सब से छोटा था। वह अपने बाप के साथ भेड़ें चराया करता था। बचपन से ही उसे सितार बजने का शौक़ था। इसके कुछ भाई मशहूर राजा सोल (जिसे क़ुरआन में सालेह कहा गया है) की फ़ौज में सिपाह थे। 
एक दिन वह भाइयों के लिए रोटियाँ लेकर फौजी दस्ते में गया। उसने देखा कि दुश्मन फिलिस्ती फ़ौज का कमांडर ज़र व् बख़्तर और हथियारों से लैस मैदान में डटा हुवा मुकाबले का इन्तज़ार कर रहा है। 
( उस ज़माने में जंगें ऐसी होती थीं कि मुक़ाबिल फौजो के कमांडर मैदान में मुक़ाबला करते , उनकी ही जीत या हार से जंग का अंजाम मान लिया जाता था, फौजों का खून खराबा नहीं होता था।) 
इस तरह फिलिस्ती कमांडर मैदान में उतर कर मुखालिफ को ललकार रहा था। दाऊद जोकि फौजी भी नहीं था मुकाबले की ख्वाहिश ज़ाहिर की। थोड़े से एतराज़ के बाद सोल के दस्ते की तरफ से दाऊद मुकाबले के लिए सामने आ गया था। दाऊद ने अपने गोफने में गुल्ला रख कर गोफने को घुमाया और ऐसा वार किया कि फ़िलस्ती कमांडर अपना सर थाम कर वहीँ ढेर हो गया। दाऊद ने पालक झपकते ही उसकी गर्दन उतार ली। फ़िलस्ती फ़ौज की सिकश्त हुई और उलटे पाँव मैदान से भाग कड़ी हुई। 
इस वाक़ए से इसराईलियों में दाऊद की ऐसी शोहरत हुई कि राजा सोल तक उससे रुवाब खाने लगा। उसके शान में एक कहावत रायज हुई 
"सोल ने मारे हज़ार , दाऊद ने मारा लाख को " 
इसकी शोहरत से राजा अपने लिए खतरा महसूस करने लगा यहाँ तक कि उसको मरवा देने का इरादा कर लिया मगर इस तरकीब के साथ कि अवाम को भनक न लगे। 
उसने साजिशन दाऊद को अपनी बेटी तक ब्याह दी। 
राजा सोल की नियत को दाऊद भांप गया। अपनी जान बचाने के लिए वह राजा के जाल से बाहर निकल गया.
 और लुटेरों में शामिल हो गया। राजा सोल दाऊद की तलाश में निकल पड़ा , ऐसा वक़्त भी आया कि दाऊद दो बार सोल के फंदे में आया। दाऊद को जब राजा के सामने पेश किया गया तो वह बड़े एहतराम से हाज़िर हुआ। उसने कहा आप मेरे राजा और बुज़ुर्ग  हैं। 
सोल को उस पर तरस आ गया और छोड़ दिया। 
दाऊद के खिलाफ उसका शक  बना रहा। वह  छोड़ कर भी उसका पीछा करने के लिए निकल जाता , ग़रज़  मारने की  फ़िराक़ में एक दिन वह खुद मर गया जिसक रंज दाऊद को भी हुवा उसने सोल का  मर्सिया  भी लिखा। 
राजा सोल से बचने के लिए दाऊद ने फ़िलस्तियो के मुल्क में पनाह ले रखी थी।  उसकी लूट मार बदस्तूर जारी रही , वह जिन बस्तियों पर हमला करता , वहां तबाही और बर्बादी के निशान छोड़ जाता। 
तारीख में दाऊद की एक झलक 
दाऊद अपने आदमियों को साथ लेकर मशूरियों , गिरजियों और अमालील्यों पर छापे मरता था। यह क़ौमें ज़माना ए क़दीम में मिस्र की तरफ शोर तक बसी हुई थीं। दाऊद ने उन मुल्कों पर हमला बोला और वहां के मर्द व् ज़न को ज़िंदा नहीं छोड़ा। उनकी भेड़ें गधे गायें और ऊँट सब लूट लेता, 
दर अस्ल लूट मार करता फिलिस्तियों का ही मगर अपने फिलिस्ती आक़ा से बतलाता कि इस्राईल्यों को तबाह कर रहा है। 
दाऊद डाकुओं के एक बड़े गिरोह का सरदार बन गया था इसकी दहशत गरी की चर्चा दूर दूर तक फ़ैल गई थी। राजा सोल का मर्सिया गाते गाते और उसके दामाद का फायदा लेते हुए , आखिर कार एक दिन दाऊद इस्राइलियों का बादशाह बन गया। 
और क़ुरआन दाऊद को "दाऊद अलैहिस्सलाम " कहता है। 
दाऊद हर पराजित देश से एक रानी चुनता, इस तरह उसकी कई पत्नियां हो गई थीं। एक रोज़ उसने हाथी पर सवार होकर बस्ती का जायज़ा ले रहा था कि उसे एक हित्ती औरत अपने आँगन में नंगी नहाते दिखी, उसने दाऊद को दीवाना कर दिया, दाऊद ने पता लगाया कि वह नाज़ुक अन्डम कौन है। पता चला कि इसका नाम बतशीबा है और शौहर का नाम ऊर्या है जो कि उसी की मुलाज़मत में था।
 दाऊद ने उसका काम वैसे ही तमाम किया जैसे कि जहांगीर ने शेर अफगान का काम तमाम किया था।  उसके बाद बतशीबा दाऊद की चहीति रानी बनी। इसी के बेटे सुलेमान को दाऊद ने अपना वारिस बनाया। 
दाऊद इस्राईल्यों में अज़ीम बादशाहों में शुमार होता है। 
दाऊद बूढा हो गया , इसे सर्दी का मौसम रास न आता। दाऊद के मुआलिजों ने राय दिया कि बादशाह के लिए कोई हसीन और कमसिन दोशीजा तलाश की जाए जो रात को इसको लिपटा कर सोया करे। ग़रज़ मुल्क भर में ऐसी कुवांरी कन्या की तलाश शुरू हो गई। 
मुक़ाम शूनेम से अबीशग नाम की लड़की मिली। इस तरह सौ साला बूढ़े दाऊद का इलाज हुवा मगर वह भी उसे बचा न सकी। दाऊद ने कभी भी इसके साथ मुबशरत नहीं किया। 
दाऊद के मरने के बाद उसके बड़े बेटे अदूनिया के ताल्लुक़ात अबिशग से क़ायम हो चुके थे , वह उसे अपनी बीवी बनाना चाहता था।  इसके आलावा अदूनिया बड़े बेटे होने के नाते दाऊद की गद्दी भी चाहता था। मगर दाऊद ने अपना जांनशीन सुलेमान को पहले ही बना चुका  था। 
माँ दाखिल औरत को बीवी बनाने और गद्दी की दावेदारी की वजह से सुलेमान ने मौक़ा पाकर अदूनिया को मौत के घाट उतार दिया। 
दाऊद एक कामयाब शाशक था। वह अपने मुल्की सलाह कारों , सादिकों (पुरोहित} नबियों , नातानों , यहुया दायाग के मशविरे से ही काम करता था. 
आखीर अय्याम में वह बुत परस्ती करने लगा था। 
(यह थी दाऊद की हक़ीक़त जिसकी कहानी मुहम्मदी अल्लाह क़ुरआन में अजीब व् ग़रीब गढ़े हुए है)  



जीम 'मोमिन' निसारुल-ईमान

Thursday, 12 October 2017

Hindu Dharm Darshan 101



गीता और क़ुरआन
अर्जुन पूछते हैं  - - -
>हे मधु सूदन !
आपने जिस योग पद्धति का संक्षेप में वर्णन किया है,
वह मेरे लिए अव्यवहारिक तथा असहनीय है, 
क्योकि मन चंचल तथा अस्थिर है.
**
हे कृष्ण ! 
चूँकि मन चंचल, उच्छूँकल, हठीला तथा अत्यन्त बलवान है. 
अतः इसे मुझे वश में करना, 
वायु को वश में करने से भी अधिक कठिन लगता है.   
*** 
भगवान् श्री कृष्ण कहते हैं - - -
हे महाबाहु कुंती पुत्र ! 
निःसंदेह चंचल मन को वश में करना अत्यंत कठिन है,
किन्तु उपयुक्त अभ्यास द्वारा तथा विरक्ति द्वारा ऐसा संभव है.
श्रीमद् भगवद् गीता अध्याय  -6  - श्लोक -33-34-35 

>अर्जुन की दलील बिकुल सहीह है. 
ओशो रजनीश कहता है , 
कोई माई का लाल अपने मन को एक मिनट से ज्यादा स्थिर नहीं कर सकता. जब कि उसका काम ही था कि ध्यान में डुबोना. 
जब मानव मस्तिष्क ध्यान में जा ही नहीं सकता तो उसकी कोशिश क्यों ?
मेरा दिल कुछ घंटों के लिए दिमाग़ से अलग करके एक प्लेट में रखा रहा, 
उन घंटों की कोई याद दाश्त मेरे पास नहीं है. 
अर्थात मेरा शरीर घंटों ध्यान और योग युक्त था, 
इससे बड़ा योग क्या हो सकता है ? 
सवाल उठता है कि विचार मुक्त शरीर ने कौन सी उपलब्धियाँ उखाड़ ली. 
हमारी विडंबना यह है कि हम गुरु के दिए हुए उत्तर पर सवाल नहीं करते 
क्योंकि हम उसका ज़रुरत से ज्यादह सम्मान करते हैं, उससे डरते है.

और क़ुरआन कहता है - - - 
मुहम्मद अपनी उम्मत को इसी तरह समझाते हैं - - -
>" और मैं इस तौर पर आया हूँ कि तस्दीक करता हूँ इस किताब को जो तुहारे पास इस से पहले थी,यानि तौरेत की. और इस लिए आया हूँ कि तुम लोगों पर कुछ चीजें हलाल कर दूं जो तुम पर हराम कर दी गई थीं और मैं तुम्हारे पास दलील लेकर आया हूँ तुम्हारे परवर दिगर कि जानिब से. हासिल यह कि तुम लोग परवर दिगर से डरो और मेरा कहना मानो"
सूरह आले इमरान ३ तीसरा परा आयात (50) 

जीम 'मोमिन' निसारुल-ईमान

Tuesday, 10 October 2017

Quraan ke jhoot aur taureti sadaqat 14

मेरी तहरीर में - - -
क़ुरआन का अरबी से उर्दू तर्जुमा (ख़ालिस) मुसम्मी
''हकीमुल उम्मत हज़रत मौलाना अशरफ़ अली साहब थानवी''का है,
हदीसें सिर्फ ''बुख़ारी'' और ''मुस्लिम'' की नक्ल हैं,
और तबसरा ---- जीम. ''मोमिन'' का है।
नोट: क़ुरआन में (ब्रेकेट) में बयान किए गए अलफ़ाज़ बेईमान आलिमों के होते हैं,जो मफ़रूज़ा अल्लाह के उस्ताद और मददगार होते हैं और तफ़सीरें उनकी तिकड़म हैं और चूलें हैं.
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क़ुरआन में कई अच्छी और कई बुरी हस्तियों का नाम बार बार आता है , जिसमे उनका ज़िक्र बहुत मुख़्तसर होता है। पाठक की जिज्ञासा उनके बारे में बनी रहती है कि वह उनकी तफ्सील जानें।  मुहम्मद ने इन हुक्मरानों का नाम भर सुना था और उनको पैग़म्बर या शैतान का दरजा देकर आगे बढ़ जाते हैं , उनका नाम लेकर उसके साथ मन गढ़ंत लगा कर क़ुरआन पढ़ने वालों को गुमराह करते हैं। दर अस्ल यह तमाम हस्तियां यहूद हैं जिनका  विवरण तौरेत में आया है, मैं उनकी हक़ीक़त बतलाता हूँ , इससे मुहम्मदी अल्लाह की जिहालत का इन्किशाफ़ होता है। 
क़ुरआन के झूट - - - और तौरेती सदाक़त  

मूसा 
(2)


खुदा ने मूसा को तीन करिश्मे दिए ,
१- जब अपनी लाठी को ज़मीन पर डाल दोगे तो वह सांप बन जाएगी। 
२- अपना हाथ बगल में डाल कर निकालोगे तो गदेली पर कोढ़ के दाग आ जाएंगे और दोबारा डाल कर निकालो गे तो दाग गायब हो जाएंगे। ३ 
३ - नील नदी के पानी को चुल्लू में लेकर डालोगे तो वह खून बन जाएगा।
मूसा ने ख़ुदा से गुज़ारिश की कि वह हकला है , फ़िरऔन के दरबार में कैसे बातें करेगा ?
ख़ुदा  ने इसके भाई हारुन को इसका मददगार बना दिया ,
फिर भी मूसा इस काम से घबरा रहा था क्योकि मिस्र जाकर वह मुसीबत में नहीं पड़ना चाहता था। उसने ख़ुदा  से कहा , तू इस काम के लिए किसी और को चुन ले। 
यह सुन कर ख़ुदा  नाराज़ हुवा और उसे मिस्र जाने का हुक्म दिया। 
मूसा अपने ससुर ययतरु से नेक दुआएं लेकर भाई हारुन के साथ मिस्र के लिए रवाना हो गया। 
उसने मिस्र पहुँच कर फिरौन से दरख्वास्त की कि वह अपने भाई इसराईलियों को लेकर हेरोब की पहाड़ियों पर इबादत के लिए जाना चाहता है। इसके लिए योवहा (ख़ुदा) ने हमें हुक्म दिया है। 
फ़िरऔन मूसा की चल को समझ जाता है कि वह मिस्र से इस्राइलियों को आज़ाद कराना चाहता है जोकि यहाँ मेहनत मज़दूरी करके गुज़ारा करते हैं , गोया उसने साफ़ इंकार कर दिया , इसके बाद उसने इसराईलियों पर काम के बोझ को दोगुना कर दिया।
 मूसा परेशान होकर अपने आप से कहता है , कहाँ मुसीबत में डाल दिया मुझको और मेरे भाई इसराईलियों को ? यवोहा उसे तसल्ली देता है। 
 मूसा और हारुन अपना जादू दिखलाने फ़िरऔन के दरबार में जाते हैं। 
मूसा का मुक़ाबला फ़िरऔन के जादूगरों से शुरू हो जाता है जिसमें दरबारी जादूगर मूसा से कहीं पर कमज़ोर  साबित नहीं होते। 
इसके बाद शुरू होता है मिस्र पर अज़ाब ए इलाही का सिलसिला। 
मूसा अपनी लाठी के इशारे से नील नदी की सभी मछलियों को मार देता है.
नील नदी के सारे मेढक खुश्की पर आ जाते है। 
मच्छर पूरे मिस्र पर अज़ाब बन कर छा जाते हैं। 
डंक दार कीड़े पैदा हो जाते हैं। 
पूरे मिस्र में बीमारियां फ़ैल जाती हैं। 
इसके बाद टिड्डियों का हमला होता है। 
मूसा ने फ़िरऔन को चेतावनी दी कि अगर इसराईलियों को हेरोब पर न जाने दिया गया तो मिस्र में इंसानों और मवेशियों के पहले सभी बच्चे मौत के घाट उत्तर जाएंगे। 
मूसा की चेतावनी से फ़िरऔन घबरा जाता और इसराईलियों को हेरोब पहाड़ियों पर जाने की इजाज़त दे देता है । 
इसराईलियों का मिस्र से हिजरत (प्रवास)
युसूफ के ज़माने में सिर्फ सत्तर नफर बनी इसराईल (याक़ूब की औलादें)के नाम से कनान से मिस्र में दाखिल हुए थे जोकि ४३० सालों में फल फूल कर छः लाख से ऊपर हो गए थे। इन बनी इसराईलियों यानी याक़ूब की औलादों को फ़िरऔन मिस्र से निकाल रहा था। 
मूसा की बद दुआओं से मिस्र का माहौल ऐसा हो गया था कि  सारे मिस्री इब्रानियों से मरऊब हो चुके थे और इनकी बातों पर भरोसा करने लग गए थे। इसका असर ये हुवा कि इसराईलियों ने मिस्रियों से क़र्ज़ ऐंठा , इसराईलियों औरतों ने मिस्री औरतों से जेवरात ऐंठे कि हैरोब जाकर आपके लिए दुआ करेंगे। 
तौरेत कहती हैं "इस तरह इसराईलियों ने मिस्रियों को रातो रत लूट लिया।" 
इनके साथ इनके सारे असासे , मवेशी और कुछ मिस्री भी थे। 
 बड़ा क़ाफ़िला पूरी रात चलता रहा। इस रात को त्योहारों की तरह मनाने का रवायत इसराईलियों में आज भी क़ायम है। 
सुब्ह हुई , दिन आया , इस दिन को इसराईलियों ने अपने कैलेंडर साल का पहला दिन माना और इस दिन को "पास्का " के नाम से मंसूब किया। इसराईलियों में जश्न ए पास्का मानाने का रिवाज आज भी चला आ रहा है। 
इसराईल अपने साथ अपने नबी जोसेफ़ का ताबूत भी ले गए जो मिस्र के म्युज़ियम में महफूज़ था। 
इधर फ़िरऔन को एहसास हुवा कि वह बहुत बड़ी गलती कर बैठा है। सारे मिस्र से खादिम और मज़दूर लापता हो चुके थे , अब कौन करेगा इनके काम ?
इसने अपने फैसले पर नज़र ए सानी किया और अपनी फ़ौज को हुक्म दिया कि इसराईलियों के काफिले को रोके और वापस ले आए। 
तब तक मूसा का क़ाफ़िला एक बड़ा सफर तय करके नड सागर (बह्र ए सौफ़) तक पहुँच चुका था। मूसा को खबर मिली की मिस्री फ़ौज इब्रानियों को वापस लेने के लिए आ रही है। इस खबर से लोग घबराए , मूसा ने उन्हें तसल्ली दी और बह्र ए सौफ़ की तरफ अपने दोनों हाथों को दुआ के लिए फैला दिया। 
सागर दो दीवारों में बट गया और बीच में एक खुश्क राह बन गई। मूसा ने इस करिश्माई रहगुज़र पर इसराईलियों को डाल दिया। 
क़ाफ़िला नड सागर को पार कर चुका था कि फ़िरऔन की फौजें दूसरे किनारे पर पहुँच चुकी थीं। मिस्री सरबराह ने अपनी फ़ौज को उसी रस्ते पर चल कर इसराईलियों तक पहुँचने का हम दिया। 
मूसा ने अपने फैले हुए बाज़ुओं को समेट लिया ,पानी में बनी हुई दोनों दीवारें गायब हो गईं और फ़िरऔन की फ़ौज उसमे ग़र्क़ हुई 
नड सागर लाल सागर के क़रीब ही है। इसे क़ुरआन दरयाय नील लिखता है। 

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जीम 'मोमिन' निसारुल-ईमान

Hindu Dharm Darshan 100



गीता और क़ुरआन

भगवान् कृष्ण कहते हैं - - -
>जो मुझे सर्वत्र देखता है 
और सब कुछ मुझमें देखता है, 
उसके लिए न तो मैं कभी अदृश्य होता हूँ 
और न वह मेरे लिए अदृश्य होता है.
**जो योगी मुझे और परमात्मा को अभिन्न जानते हुए 
परमात्मा की भक्ति पूर्वक सेवा करता है , 
वह हर प्रकार से मुझमें सदैव स्थित रहता है.
श्रीमद् भगवद् गीता अध्याय  -6  - श्लोक -30 -31 

>जिधर देखता हूँ , उधर तू ही तू है,
न तेरा स जलवा न तेरी सी बू है.
भगवन श्री ! दुन्या ने तो आपका अंत देख कर सब कुछ देख लिया 
जब आप बिना खाना पानी बे यार व् मददगार अठ्ठारह दिनों तक आम के बाग़ में तड़प तड़प कर मरे. आपकी वास्तविकता यह है. लेखनी आप को चने की झाड पर चढ़ाए फिरे.

और क़ुरआन कहता है - - - 
"अल्लाह बड़ी नरमी के साथ बन्दों को अपनी बंदगी की अहमियत को समझाता है. 
काफिरों की सोहबतों के नशेब ओ फ़राज़ समझाता है. 
अपनी तमाम खूबियों के साथ बन्दों पर अपनी मालिकाना दावेदारी बतलाता है. 
दोज़ख पर हुज्जत करने वालों को आगाह करता है. 
कुरान से इन्हिराफ़ करने वालों का बुरा अंजाम है, 
ग़रज़ ये कि दस आयातों तक अल्लाह कि कुरानी तान छिडी रहती है 
जिसका कोई नतीजा अख्ज़ करना मुहाल है.
"सूरह आले इमरान ३ तीसरा परा आयात (16-26)

जीम 'मोमिन' निसारुल-ईमान

Saturday, 7 October 2017

Hindu Dharm Darshan 99



गीता और क़ुरआन

भगवान् कृष्ण कहते हैं - - -
>मेरे शुभ भक्तों के विचार मुझ में वास करते हैं. 
उनके जीवन मेरी सेवा में अर्पित रहते हैं 
और वह एक दूसरे को ज्ञान प्रदान करते हैं 
तथा मेरे विषय में बातें करते हुए परम संतोष 
तथा आनंद का अनुभव करते हैं.
** जो प्रेम पूर्वक मेरी सेवा करने में परंपर लगे रहते हैं, 
उन्हें मैं ज्ञान प्रदान करता हूँ. 
जिसके द्वारा वे मुझ तक आ सकते हैं.
श्रीमद् भगवद् गीता अध्याय  -  10  श्लोक - 9 +10 

>गीता के भगवान् कैसी सेवा चाहते हैं ? 
भक्त गण उनकी चम्पी  किया करें ? 
हाथ पाँव दबाते रहा करें ? 
मगर वह मिलेंगे कहाँ ? 
वह भी तो हमारी तरह ही क्षण भंगुर थे. 
मगर हाँ ! वह सदा जीवित रहते है, 
इन धर्म के अड्डों पर. 
इन अड्डों की सेवा रोकड़ा या सोने चाँदी के आभूषण भेंट देकर करें. इनके आश्रम में अपने पुत्र और पुत्रियाँ भी इनके सेवा में दे सकते हैं.  
यह इस दावे के साथ उनका शोषण करते हैं कि 
"कृष्ण भी गोपियों से रास लीला रचाते थे." 
धूर्त बाबा राम रहीम की चर्चित तस्वीरें सामने आ चुकी हैं. 
अफ़सोस कि हिदू समाज कितना संज्ञा शून्य है.
और क़ुरआन कहता है - - - 
>" आप फरमा दीजिए क्या मैं तुम को ऐसी चीज़ बतला दूँ जो बेहतर हों उन चीजों से, ऐसे लोगों के लिए जो डरते हैं, उनके मालिक के पास ऐसे ऐसे बाग हैं जिन के नीचे नहरें बह रही हैं, हमेशा हमेशा के लिए रहेंगे, और ऐसी बीवियां हैं जो साफ सुथरी की हुई हैं और खुश नूदी है अल्लाह की तरफ से बन्दों को."
सूरह आले इमरान ३ तीसरा परा आयात (15)

देखिए कि इस क़ौम की अक़्ल को दीमक खा गई। अल्लाह रब्बे कायनात बंदे मुहम्मद को आप जनाब कर के बात कर रहा है, इस क़ौम के कानों पर जूँ तक नहीं रेगती. अल्लाह की पहेली है बूझें? अगर नहीं बूझ पाएँ तो किसी मुल्ला की दिली आरजू पूछें कि वह नमाजें क्यूँ पढता है? ये साफ सुथरी की हुई बीवियां कैसी होंगी, ये पता नहीं, अल्लाह जाने, जिन्से लतीफ़ होगा भी या नहीं? औरतों के लिए कोई जन्नती इनाम नहीं फिर भी यह नक़िसुल अक्ल कुछ ज़्यादह ही सूम सलात वालियाँ होती हैं। अल्लाह की बातों में कहीं कोई दम दरूद है? कोई निदा, कोई इल्हाम जैसी बात है? दीन के कलम कारों ने अपनी कला करी से इस रेत के महेल को सजा रक्खा है।

जीम 'मोमिन' निसारुल-ईमान