Saturday, 23 September 2017

Hindu Dharm Darshan 94



गीता और क़ुरआन
भगवान् कृष्ण कहते हैं - - -
>जो देवताओं की पूजा करते हैं, वे देवताओं के बीच जन्म लेते है,
जो पितरों को पूजते हैं वे पितरों के पास जाते हैं, 
जो भूत प्रेतों की उपासना करते हैं वे उन्हीं के बीच जन्म लेते हैं, 
और जो मेरी पूजा करते है वे मेरे मेरे साथ ही निवास करते हैं.
श्रीमद् भगवद् गीता अध्याय  - 9  - श्लोक -25 
>हे कृष्ण भगवान ! तुमको पूजने से तो बेहतर है हम औरों को पूजें, या अपने पितरों को. कम से कम दूसरे आपकी तरह स्वयंभू महिमा मंडित होकर हमारा दिमाग़ तो नहीं खाते रहेंगे.

और क़ुरआन कहता है - - - 
>''आप फरमा दीजिए तुम तो हमारे हक में दो बेहतरीयों में से एक बेहतरी के हक में ही के मुताज़िर रहते हो और हम तुम्हारे हक में इसके मुन्तजिर रहा करते हैं कि अल्लाह तअला तुम पर कोई अज़ाब नाज़िल करेगा, अपनी तरफ से या हमारे हाथों से.सो तुम इंतज़ार करो, हम तुम्हारे साथ इंतज़ार में हैं.''
सूरात्तुत तौबा ९ - १०वाँ परा आयत (५२)
यह आयत मुहम्मद की फितरते बद का खुला आइना है, कोई आलिम आए और इसकी रफूगरी करके दिखलाए. ऐसी आयतों को ओलिमा अवाम से ऐसा छिपाते हैं जैसे कोई औरत बद ज़ात अपने नाजायज़ हमल को ढकती फिर रही हो. आयत गवाह है कि मुहम्मद इंसानों पर अपने मिशन के लिए अज़ाब बन जाने पर आमादा थे. इस में साफ़ साफ मुहम्मद खुद को अल्लाह से अलग करके निजी चैलेन्ज कर रहे हैं, क़ुरआन अल्लाह का कलाम को दर गुज़र करते हुए अपने हाथों का मुजाहिरा कर रहे हैं. अवाम की शराफत को ५०% तस्लीम करते हुए अपनी हठ धर्मी पर १००% भरोसा करते हैं. तो ऐसे शर्री कूढ़ मग्ज़ और जेहनी अपाहिज हैं 

जीम 'मोमिन' निसारुल-ईमान

Quraan ke jhoot aur taureti sadaqat Q9

मेरी तहरीर में - - -
क़ुरआन का अरबी से उर्दू तर्जुमा (ख़ालिस) मुसम्मी
''हकीमुल उम्मत हज़रत मौलाना अशरफ़ अली साहब थानवी''का है,
हदीसें सिर्फ ''बुख़ारी'' और ''मुस्लिम'' की नक्ल हैं,
और तबसरा ---- जीम. ''मोमिन'' का है।
नोट: क़ुरआन में (ब्रेकेट) में बयान किए गए अलफ़ाज़ बेईमान आलिमों के होते हैं,जो मफ़रूज़ा अल्लाह के उस्ताद और मददगार होते हैं और तफ़सीरें उनकी तिकड़म हैं और चूलें हैं.
**************

क़ुरआन के झूट - - - और तौरेती सदाक़त  - - -

क़ुरआन में कई अच्छी और कई बुरी हस्तियों का नाम बार आता है, जिसमे उनका ज़िक्र बहुत मुख़्तसर होता है. पाठक की जिज्ञासा उनके बारे में बनी रहती है कि वह उनकी तफ्सील जानें. मुहम्मद ने इन हुक्मरानों का नाम भर सुना था और उनको पैग़म्बर या शैतान का दरजा देकर आगे बढ़ जाते हैं, उनका नाम लेकर उसके साथ मन गढ़ंत लगा कर क़ुरआन पढ़ने वालों को गुमराह करते हैं. दर अस्ल यह तमाम हस्तियां यहूद हैं जिनका विवरण तौरेत में आया है, मैं उनकी हक़ीक़त बतलाता हूँ, इससे मुहम्मदी अल्लाह की जिहालत का इन्किशाफ़ होता है. 

इस्हाक़ (आइशक़) 
क़ुरआन में कई अच्छी और कई बुरी हस्तियों का नाम बार बार आता है , जिसमे उनका ज़िक्र बहुत मुख़्तसर होता है।  पाठक की जिज्ञासा उनके बारे में बनी रहती है कि वह उनकी तफ्सील जानें।  मुहम्मद ने इन हुक्मरानों का नाम भर सुना था और उनको पैग़म्बर या शैतान का दरजा देकर आगे बढ़ जाते हैं , उनका नाम लेकर उसके साथ मन गढ़ंत लगा कर क़ुरआन पढ़ने वालों को गुमराह करते हैं।  दर अस्ल यह तमाम हस्तियां यहूद हैं जिनका विवरण तौरेत में आया है, मैं उनकी हक़ीक़त बतलाता हूँ , इससे मुहम्मदी अल्लाह की जिहालत का इन्किशाफ़ होता है। 


खुदा एक बार फिर इब्राहीम और उसकी नस्लों पर इन्तेहाई दरजा मेहरबान रहने का वादा किया। उसने उसको अपने दीन पर पाबन्द रहने का हुक्म दिया। खुदा ने इब्राहीम का नाम बदल कर अब्रहाम कर दिया और सारे का नाम बदल कर सारा कर दिया 
खुदा ने बूढी सारा से भी एक औलाद होने की खुश खबरी दी। 
 अब्रहाम को इस्माईल की फ़िक्र ज़्यादा थी , खुदा ने इसके दिल की बात जान लिया और कहा , मैं इस्माईल को भी दुआ देता हूँ कि उसकी नस्ल अफ़ज़ाई होगी मगर सारा के बेटे इस्हाक़ पर मेरी नज़र-ए-करम ज़्यादा होगी। 
खुदा ने अपना वादा पूरा किया , नब्बे साल की उम्र में सारा ने इस्हाक़ को जन्म दिया। आठवें दिन खुदा के निज़ाम के तहत इसका खतना हुवा। 
जब इसका का दूध छुड़ाया गया तो इब्राहीम ने एक बड़ी दावत करके खुशियाँ मनाई।  
एक रात खुदा ने इब्राहीम को ख्वाब में इस्हाक़ की क़ुरबानी का हुक्म दिया। दूसरे दिन इब्राहीम अपने बेटे इस्हाक़ को लेकर , देखे हुए ख्वाब के मुताबिक़ उस पहाड़ी पर चल पड़ा जहाँ पर खुदा ने इसहाक़ की क़ुरबानी मांगी थी। 
तीन दिन के सफर के बाद इब्राहीम उस पहाड़ी पर पहुँचा। उसने यहाँ पर एक बेदी बनाई और उस पर लकड़ी रखी , फिर इस्हाक़ के हाथ-पाँव बांध कर छुरा उठाया ही था कि निदा आई - - -
"बच्चे पर कोई ज़र्ब न आए "
वह रुक गया। उसने देखा कि एक मेमना सामने खड़ा था जिसकी सीगें झाड़ियों में फंसी हुई थीं। मेमने को झाड़ियों से छुड़ा कर उसने उसकी क़ुरबानी दी और इस्हाक़ को घर लाया। 



जीम 'मोमिन' निसारुल-ईमान

Thursday, 21 September 2017

Hindu Dharm Darshan 93



गीता और क़ुरआन
भगवान् कृष्ण कहते हैं - - -
>बुद्धिमान मनुष्य दुःख के कारणों से भाग नहीं लेता 
जोकि भौतिक इन्द्रियों के संसर्ग से उत्पन्न होते हैं.
हे कुंती पुत्र ! 
ऐसे भोगों का आदि तथा अंत होता है.
अतः चतुर व्यक्ति उनमे आनंद नहीं लेता.
श्रीमद् भगवद् गीता अध्याय  -5  - श्लोक -22 

>भौतिक इन्द्रियों के संसर्ग से उत्पन्न सुख, दुःख कैसे हो गए ? 
इस सुख से वंचित व्यक्ति दुखी होता है, 
ऐसा भगवान् कहते हैं और कहते हैं 
इस दुःख से पलायन नहीं करना चाहिए. 
सवाल यह है कि ऐसे दुःख अपने लिए पैदा ही क्यों किए जाएं ?
सुख को त्याग कर. 
भगवान् कहते हैं 
"ऐसे भोगों का आदि तथा अंत होता है." 
आदि तथा अंत तो सभी का होता है चाहे वह भोग हो अथवा अभोग. 
व्यक्ति को चतुर होना चाहिए या सरल ? हे भगवन !
*
और क़ुरआन कहता है - - - 
>"बिल यकीन जो लोग कुफ्र करते हैं, 
हरगिज़ उनके काम नहीं आ सकते, 
उनके माल न उनके औलाद, 
अल्लाह तआला के मुकाबले में, ज़र्रा बराबर नहीं 
और ऐसे लोग जहन्नम का सोखता होंगे।"
सूरह आले इमरान ३ तीसरा परा आयात (१०)

भगवान् और अल्लाह की बातें एक जैसी ही हैं, 


जीम 'मोमिन' निसारुल-ईमान

Quraan ke jhoot aur taureti sadaqat Q8

मेरी तहरीर में - - -
क़ुरआन का अरबी से उर्दू तर्जुमा (ख़ालिस) मुसम्मी
''हकीमुल उम्मत हज़रत मौलाना अशरफ़ अली साहब थानवी''का है,
हदीसें सिर्फ ''बुख़ारी'' और ''मुस्लिम'' की नक्ल हैं,
और तबसरा ---- जीम. ''मोमिन'' का है।
नोट: क़ुरआन में (ब्रेकेट) में बयान किए गए अलफ़ाज़ बेईमान आलिमों के होते हैं,जो मफ़रूज़ा अल्लाह के उस्ताद और मददगार होते हैं और तफ़सीरें उनकी तिकड़म हैं और चूलें हैं.
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क़ुरआन के झूट - - - और तौरेती सदाक़त  - - -

क़ुरआन में कई अच्छी और कई बुरी हस्तियों का नाम बार आता है, जिसमे उनका ज़िक्र बहुत मुख़्तसर होता है. पाठक की जिज्ञासा उनके बारे में बनी रहती है कि वह उनकी तफ्सील जानें. मुहम्मद ने इन हुक्मरानों का नाम भर सुना था और उनको पैग़म्बर या शैतान का दरजा देकर आगे बढ़ जाते हैं, उनका नाम लेकर उसके साथ मन गढ़ंत लगा कर क़ुरआन पढ़ने वालों को गुमराह करते हैं. दर अस्ल यह तमाम हस्तियां यहूद हैं जिनका विवरण तौरेत में आया है, मैं उनकी हक़ीक़त बतलाता हूँ, इससे मुहम्मदी अल्लाह की जिहालत का इन्किशाफ़ होता है

इस्माईल 
इब्राहीम की बीवी सारा ने एक दिन शौहर से कहा कि मैं माँ नहीं बन सकती , इस लिए तुम अपनी मिस्री सेविका को रखैल बना कर रख लो , इस से अवलाद मिल सकती है। इब्राहीम ने सारा की राय मान ली। सारा की मिस्री सेविका का नाम हागार (हाजरा) था।  कुछ रोज़ बाद ही वह हामला हो गई तब मुआमला बिगड़ गया क्योंकि वह इतराने लगी , जिसकी वजह से सारा एहसास कमतरी में मुब्तिला हो गई , नतीजतन सारा और इब्राहीम में कहा सुनी होने लगी।  तंग आकर इब्राहीम ने सारा को अख्तियार दे दिया कि वह जो दिल चाहे करे , गोया सारा हाजरा को तंग करने लगी , इतना कि हाजरा को घर छोड़ना पड़ा। 
हाजरा वीराने में भटकती हुई एक झरने की पास पर पहुँची जो सूर के रास्ते में था , जहाँ इसे एक फरिश्ता मिला जिसने इसकी दिल जोई की।  उसने बतलाया कि तेरी अवलाद की नस्लें इतनी हो जाएँगी कि गिनी न जा सकेंगी।  इसने हाजरा के पेट में पलने वाले बच्चे का नाम इस्माईल रखने को कहा और कहा इसकी शक्ल जंगली गधे जैसी होगी। वह इंसानी बिरादरी का मुखालिफ होगा। फ़रिश्ते के समझाने बुझाने के बाद हाजरा इब्राहीम के पास वापस चली गई। वहाँ इसने अपने बच्चे को जनम दिया  
हाजरा के माँ बन जाने के बाद सारा भी हामला हुई और उसने भी एक बेटे को जन्म दिया जिसका नाम इस्हाक़ पड़ा। 
सारा को हाजरा और इसके बच्चे से फिर जलन होने लगी , इसे दोनों का वजूद अपने घर में गवारा न था। हाजरा को अपने बच्चे के साथ एक बार फिर इब्राहीम का घर छोड़ना पड़ा। 
सारा के दबाव में आकर इब्राहीम ने एक दिन कुछ खाने का सामान और एक मश्क पानी देकर हाजरा और इस्माईल को घर से निकाल दिया। हाजरा चलते चलते  बअर शीबा के वीराने में पहुँच गई और वहां भटकने लगी। खाना और पानी ख़त्म हो गया था , बच्चा भूक और प्यास से बिलखने लगा था। हाजरा से देखा न गया , वह बच्चे से दूर तीर के फ़ासले पर जा बैठी कि इस हालत में अपने बच्चे को मरता नहीं देख सकती थी। 
खुदा ने हाजरा पर रहम खाया , उसने जब आँखें खोली तो देखा सामने एक पानी का सोता बह रहा है। फ़ौरन उसने अपने बच्चे को पानी पिलाया और अपनी मशक भरी।  इस्माईल इसी मैदान में पला बढ़ा और तीर अंदाज़ बना।   

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जीम 'मोमिन' निसारुल-ईमान

Friday, 8 September 2017

Quraan ke jhoot aur taureti sadaqat Q7

मेरी तहरीर में - - -
क़ुरआन का अरबी से उर्दू तर्जुमा (ख़ालिस) मुसम्मी
''हकीमुल उम्मत हज़रत मौलाना अशरफ़ अली साहब थानवी''का है,
हदीसें सिर्फ ''बुख़ारी'' और ''मुस्लिम'' की नक्ल हैं,
और तबसरा ---- जीम. ''मोमिन'' का है।
नोट: क़ुरआन में (ब्रेकेट) में बयान किए गए अलफ़ाज़ बेईमान आलिमों के होते हैं,जो मफ़रूज़ा अल्लाह के उस्ताद और मददगार होते हैं और तफ़सीरें उनकी तिकड़म हैं और चूलें हैं.
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क़ुरआन के झूट - - - और तौरेती सदाक़त  - - -

क़ुरआन में कई अच्छी और कई बुरी हस्तियों का नाम बार आता है, जिसमे उनका ज़िक्र बहुत मुख़्तसर होता है. पाठक की जिज्ञासा उनके बारे में बनी रहती है कि वह उनकी तफ्सील जानें. मुहम्मद ने इन हुक्मरानों का नाम भर सुना था और उनको पैग़म्बर या शैतान का दरजा देकर आगे बढ़ जाते हैं, उनका नाम लेकर उसके साथ मन गढ़ंत लगा कर क़ुरआन पढ़ने वालों को गुमराह करते हैं. दर अस्ल यह तमाम हस्तियां यहूद हैं जिनका विवरण तौरेत में आया है, मैं उनकी हक़ीक़त बतलाता हूँ, इससे मुहम्मदी अल्लाह की जिहालत का इन्किशाफ़ होता है. 

नूह 

नूह का दौर आते आते लोगों में बुराइयां ज़्यादा बढ़ गई थीं। काइन की औलादें आदम की औलादें कही जाने लगी थीं और और सेत की औलादें खुदा की। आदमी में बुराइयाँ बढ़ गई थीं।  खुदा बेराह रवी पर चलने वाले आदमियों से रंजीदा हुवा और तमाम मख्लूक़ को फ़ना करने का फैसला किया , मगर खुदा को नूह पसंद था , इस लिए नूह को सात दिनों का मौक़ा दिया कि वह एक कश्ती बना ले। 
खुदा ने कश्ती की तामीर के बारे में अपनी हिदायत दिया कि कश्ती ३०० हाथ लंबी हो , ५० हाथ चौड़ी और तीस हाथ ऊंची हों। कश्ती में पाक साफ़ जानवरों के चार चार जोड़े और नापाक जानवरों के एक एक जोड़े रखे और इनकी खुराक भी। खुदा बहुत दुखी था फिर भी नूह और इसके परिवार को कश्ती में रखने को राज़ी हो गया बाकियों को फ़ना कर देने पर आमादा था। 
चालीस दिनों तक ऐसी बारिश हुई कि जैसे आसमान के फाटक खुल गए हों। इतनी बारिश हुई कि पहाड़ों का कहीं अता पता न रहा। इसके बाद तूफ़ान ख़त्म हुवा। नूह और उसके परिवार से साथ साथ तमाम जीव कश्ती से बाहर निकले। खुदा ने इन्हें धरती पर फूलने फलने की दुआ दी।  नूह  ने एक बेदी (इबादत गाह) बनाई और कुछ परिंदों की भेँट चढ़ा कर खुदा का शुक्र गुज़ार हुवा। खुदा ने इसे पसंद   किया और अहद  किया कि इसके बाद आदमियों के कारन धरती पर किसी  को बददुआ नहीं दूँगा और कभी भी तमाम मख्लूक़ को तबाह नहीं करूँगा।  खुदा ने आदमज़ादों को धरती पर फूलने फलने का आशीर्वाद दिया। 
नूह की तीन औलादें थीं - - - सेम , हाम और यीफियत 
नूह को नशे के आलम में हाम के बेटे कनान ने देख लिया जिसकी वजह से नूह बहुत नाराज़ हुवा और इसे बददुआ दी कि हाम की औलादें अपने दोनों भाइयों की औलादों की ग़ुलामी करेंगी। 
तौरैत बतलाती है कि ख़ुदा आदमियों को फ़ना होने की बद दुवा दी थी और कुरआन कहता है नूह ने ही अपनी उम्मत को बद दुवा दी थी। 
नूह से इब्राहीम तक की नस्लों का शजरा 

१- नूह २-सेम ३-अर्पिशद ४-सीलः ५-यबीर ६- पीलीग ७-रऊ ८-सरोगः ९-नाहोर १०-तेराह (आज़र ) ११-इब्राहीम

जीम 'मोमिन' निसारुल-ईमान

Dharm Darshan 92




गीता और क़ुरआन 
हिदू और मुसलमान 

गीता न ईश वाणी है न आकाश वाणी और न ही कृष्ण भगवान् का उपदेश 
जो कि कुरुक क्षेत्र में कृष्ण ने अर्जुन को दिया. 
गीता की महिमा केवल इतनी है कि पौराणिक युग में भी हमारे विद्वान भाषा, लिपि ही नहीं, विद्या कला और काव्य विधा में कुशल और निपुण थे. 
साक्षरता का परिवेश हुवा करता था जबकि उस समय संसार की बहुत सी भाषाएँ अपनी लिपि भी नहीं पैदा कर पाईं थीं. 
गीता रचैता साक्षर थे न कि ज्ञानी.
गीता साक्षर व्यक्तियों की कृति है और क़ुरान निरक्षर मुहम्मदी अल्लाह का कलाम है, वह अल्लाह जो कल्पित है. 
गीता का शक्ति पुरुष भगवान् भी कल्पित है जो ईश अवतार बन कर करिश्मा साजी करता है 
और अल्लाह जोकि संभावित शक्ति का एक रूप है
जिसे विज्ञान भी अभी तक उस रूप के शशो पंज में है. 
जैसा कि मैंने कहा गीता साक्षर पुरुष का काव्य और क़ुरान निरक्षर मुहम्मद का तराशा हुआ है शायराना बकवास. 
ज्ञान विज्ञान दोनों में नहीं. दोनों में अतिशयोक्तियाँ, मुबालगा आराईयाँ, 
अलौकिक और ग़ैर फ़ितरी बातों से भरी पड़ी हैं. 
गीता में सलीक़ा है और क़ुर आन में फूहड़ पन. 
दोनों किताबें झूट, मक्र (धूर्तता) और बेशर्मी से लैस हैं. 
हिन्द व् पाक का सारा समाजी निजाम इन किताबों को सम्हाले हुए है 
और इस निज़ाम को संभाले हुए हैं मुल्ला व् पंडे. 
यह दोनों हराम खोर सदियों से इंसान को इंसानों से लडवा रहे  है 
और खुद अपनी औलादों के साथ ऐश कर रही हैं.


जीम 'मोमिन' निसारुल-ईमान

Monday, 4 September 2017

Quraan ke jhoot aur taureti sadaqat Q6

मेरी तहरीर में - - -
क़ुरआन का अरबी से उर्दू तर्जुमा (ख़ालिस) मुसम्मी
''हकीमुल उम्मत हज़रत मौलाना अशरफ़ अली साहब थानवी''का है,
हदीसें सिर्फ ''बुख़ारी'' और ''मुस्लिम'' की नक्ल हैं,
और तबसरा ---- जीम. ''मोमिन'' का है।
नोट: क़ुरआन में (ब्रेकेट) में बयान किए गए अलफ़ाज़ बेईमान आलिमों के होते हैं,जो मफ़रूज़ा अल्लाह के उस्ताद और मददगार होते हैं और तफ़सीरें उनकी तिकड़म हैं और चूलें हैं.
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क़ुरआन में कई अच्छी और कई बुरी हस्तियों का नाम बार बार आता है , जिसमे उनका ज़िक्र बहुत मुख़्तसर होता है। पाठक की जिज्ञासा उनके बारे में बनी रहती है कि वह उनकी तफ्सील जानें।  मुहम्मद ने इन हुक्मरानों का नाम भर सुना था और उनको पैग़म्बर या शैतान का दरजा देकर आगे बढ़ जाते हैं , उनका नाम लेकर उसके साथ मन गढ़ंत लगा कर क़ुरआन पढ़ने वालों को गुमराह करते हैं। दर अस्ल यह तमाम हस्तियां यहूद हैं जिनका  विवरण तौरेत में आया है, मैं उनकी हक़ीक़त बतलाता हूँ , इससे मुहम्मदी अल्लाह की जिहालत का इन्किशाफ़ होता है। 
क़ुरआन के झूट - - - और तौरेती सदाक़त  

योसेफ़ / यूसुफ़ / जोज़फ़ 
Part 2


यूसुफ़ की ताबीर और तदबीर से बादशाह बहुत मुतास्सिर हुवा और यूसुफ़ का मुक़दमा तलब किया जोकि दो सालों से चल रहा था। पूरा मुआमला नए सिरे से पेश किया गया , कुर्ते का दमन पीछे की तरफ का चाक था इस लिए ज़ुलैख़ा को मुजरिम पाया गया जिसे खुद ज़ुलैखा ने तस्लीम कर लिया। यूसुफ़ बाइज़्ज़त बरी हुवा और उसने फ़िरऔन के दिल में अपना मुक़ाम बना लिया। फ़िरऔन ने खुश होकर यूसुफ़ को वज़ीर-खज़ाना मुक़र्रर किया , इसे सारे मिस्र का दौरा कराया और उसे "साफ़नत्त पीयूऊह " के लक़ब से नवाज़ा।  यूसुफ़ की शादी इमाम पोटी फियरऊ की बेटी आसनत से हुई। 
यूसुफ़ की ताबीर के मुताबिक़ सात साल खरे उतरे , इतना गल्ला पैदा हुवा कि जिसकी नाप तौल रखना मुमकिन न था।  उसके बाद मुल्क और आस-पास ऐसा क़हत पड़ा कि लोग दाने दाने को मुहताज हो गए। फ़िरऔन ने यूसुफ़ को पूरा अख्तियार दे रखा था कि वह ग़ल्ले को जिस तरह चाहे रिआया को बाटे या बाहर वालों को बेचे। यूसुफ़ की हिकमत-अमली से बादशाह का खज़ाना लबरेज़ हो गया था।  मुल्क की सारी ज़मीन बादशाह की मिलकियत हो गई थी। 

यूसुफ़ के वतन कनान को भी कहत का सामना करना पड़ा जहाँ यूसुफ़ का परिवार रहता था। 
याक़ूब ने अपने कुछ बेटों को भी अनाज लेने के लिए मिस्र भेजा। यूसुफ़ से बहैसियत वज़ीर जब इन भाइयों से आमना सामना हुवा तो उसने इन सभों को पहचान लिया मगर यूसुफ़ को कोई भी न पहचान सका। उनके वहमो-गुमान में भी न था कि जिस भाई को उन्हों ने अंधे कुवें में डाल  कर मार दिया था , वह इस वक़्त हुक्मरान-मिस्र होगा। यूसुफ़ ने अपने भाइयों पर जासूसी का इलज़ाम लगा कर गिरफ्तार करा लिया और तफ्तीश के बहाने अपने सारे कुनबे की जानकारी ली।
  इस तरह यूसुफ़ को इसके बाप और भाई बिन्यामीन की खैरियत मिली। इसके बाद यूसुफ़ ने समऊन को हथकड़ी लगा कर बाकियों को इस शर्त पर छोड़ा कि अगली बार वह बेन्यामीन को साथ लेकर आएँ। युसूफ ने अनाज की कीमत भी ग़ल्ले के बोरियों में छुपा कर उन्हें वापस कर दिया। 
बेटे कनान आकर पूरी दास्तान बाप याक़ूब को सुनते हैं समऊन को यर्गः माल बनाने और बिन्यामीन को साथ लाने की शर्त को याक़ूब न मानते हुए कहता है - - -
तुम लोग यूसुफ़ को भी इसी तरह की साज़िश करके मार चुके हो , अब उसके भाई को भी मारना चाहते हो ?
बहुत यक़ीन दिलाने के बाद याक़ूब उनकी बात मान जाता है। 
कुछ दिनों बाद बेन्यामिन को साथ लेकर सभी भाई मिस्र आते हैं। यूसुफ़ अपने चहीते भाई बेन्यामिन को देखता है तो देखता ही रह जाता है , भाग कर गोशा-एतन्हाई में चला जाता है और खूब रोता है। इस बार यूसुफ़ सभी भाइयों की दावत करता है और उन्हें ठीक से परखता है कि आया इसके सभी भाई सुधर गए हैं ? इसके बाद वह सारे भेद खोल देता है कि वह कोई और नहीं , तुमहारा भाई यूसुफ़ है। इसकी खबर बादशाह तक पहुंच जाती है कि यूसुफ़ के भाई आए हुए हैं। वह उनको इजाज़त देता है कि सभी अपने खानदान के साथ मिस्र आ कर बस जाएं। वह सभी कनान जाकर माँ बाप को और घर के सभी साज़ व् सामान लेकर मिस्र में आकर आबाद हो जाते हैं। 
इस वक़्त यूसुफ़ के खानदान में कुल ७० नफ़र थे।   
यूसुफ़ की इमान दारी , वफ़ा दारी और हिकमत-ए -अमली से बादशाह इनता खुश था कि उसने मिस्र की निजामत भी यूसुफ़ को सौंप दी।  नतीजतन यूसुफ़ बादशाह को पक्का वफादार और फ़रमा बरदार बन गया। वह उसे अपने बाप का दर्जा देता था। यूसुफ़ ने जिस दूर अंदेशी से अनाज का ज़ख़ीरा बनाया , बादशाह के लिए एक वरदान था। इसके ज़रिए मुल्क और ग़ैर मुल्क की भारी दौलत बादशाह के ख़ज़ाने में आ गई थी। अवाम के पास फूटी कौड़ी भी नहीं बची कि वह ज़िंदा रह सकें। 
यूसुफ़ ने बड़ी बेरहमी के साथ अवाम की ज़मीनें बादशाह के नाम करा लीन और उनको बादशाह का मज़दूर बना लिया। ज़मीन इस शर्त पर लोगों में बाटी गईं कि पैदावार को पाँचवाँ हिस्सा बादशाह का होगा। 
यूसुफ़ का बनाया हुवा यह क़ानून हज़ारों साल से दुन्या में रायज है  

उसने अपने देखे हुए ख्वाब "कि सूरज चाँद और ग्यारह सितारे उसको सजदा कर रहे हैं। " की ताबीर को अपने बाप और भाइयों के सामने फिर दोहराई। 


जीम 'मोमिन' निसारुल-ईमान