Friday, 15 February 2019

सूरह मुल्क - 67 = سورتہ الملک (मुकम्मल)

मेरी तहरीर में - - -
क़ुरआन का अरबी से उर्दू तर्जुमा (ख़ालिस) मुसम्मी
''हकीमुल उम्मत हज़रत मौलाना अशरफ़ अली साहब थानवी''का है,
हदीसें सिर्फ ''बुख़ारी'' और ''मुस्लिम'' की नक्ल हैं,
और तबसरा ---- जीम. ''मोमिन'' का है.
नोट: क़ुरआन में (ब्रेकेट) में बयान किए गए अलफ़ाज़ बेईमान आलिमों के होते हैं,जो मफ़रूज़ा अल्लाह के उस्ताद और मददगार होते हैं और तफ़सीरें उनकी तिकड़म हैं और चूलें हैं.

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सूरह मुल्क - 67 = سورتہ الملک 
(मुकम्मल)

मुसलमानों !
ख़ुद साख़ता अल्लाह बना पैग़म्बर कहता है - - -
"वह बड़ा आलीशान है, जिसके क़ब्ज़े में तमाम सल्तनत है और हर चीज़ पर क़ादिर है, जिस ने मौत और हयात पैदा किया, ताकि तुम्हारी आज़माइश करे कि तुम में अमल में कौन ज़्यादः अच्छा है और वह ज़बरदस्त बख़्शने वाला है."
सूरह मुल्क - 67 आयत (1-2)

मुसलामानों ! 
अगर किसी अल्लाह ने तुमको आज़माने के लिए पैदा किया है तो उस पर लअनत भेजो. एक बाप अपनी औलाद को पाल पोस कर इस लिए परवान चढ़ाता कि औलाद बड़ी होकर उसके बुढ़ापे का सहारा बनेगी, 
इंसानी कमज़ोरी के तहत ये बात जायज़ हो सकती है, 
अल्लाह का अगर ये ख़याल है तो तुम उस अल्लाह के मुँह पर उसके एलान को मार दो. 

"जिसने सात आसमान ऊपर तले पैदा किए. सो तू फिर निगाह डाल के देख ले  . . . फिर बार बार निगाहें ज़ेल और दरमान्दा होकर तेरी तरफ़ लौट आएँगी और क़रीब के आसमान को चराग़ों से आरास्ता कर रखा है और हमने उनको शैतान के मारने का ज़रीया भी बना दिया है और हम ने उनके लिए दोज़ख का अज़ाब भी तैयार कर रखा है."
सूरह मुल्क - 67 आयत (3-5)

कहाँ हैं ऊपर तले सात आसमान? 
ये मुहम्मदी अटकलें हैं. 
वह अरबों खरबों सितारों और सय्यारों को शामयाने की क़िन्दील समझते हैं और सितारों के टूटने को राम बाण. 
अहमकों के सरदार सरवरे कायनात.

"जब काफ़िर लोग दोज़ख में डाले जाएँगे तो उसकी बड़ी शोर की आवाज़ सुनेंगे और वह इस तरह ज़ोर मारती होगी जैसे मालूम होगा कि ग़ुस्से के मारे फट पड़ेगी . . . "
सूरह मुल्क - 67 आयत (8 )

क्या मुहम्मदी अल्लाह में तुमको कहीं भी जेहालत नज़र नहीं आती?

"बेशक जो लोग अपने परवर दिगार से बे देखे डरते हैं, उनके लिए मग़फ़िरत और उज्र ए अज़ीम है."
सूरह मुल्क - 67 आयत (11)

पैग़म्बर दग़ाबाज़ है जो बग़ैर देखे और बिना सोचे समझे किसी अल्लाह या रसूल्लिल्लाह का यक़ीन दिलाता है. 
मुअज्ज़िन झूटी गवाही अपनी अज़ान में देता है, उसको सज़ा मिलनी चाहिए. 

"आप कहिए कि उसी ने तुमको पैदा किया और कान, नाक और दिल दिया मगर तुम लोग कम शुक्र करते हो"
सूरह मुल्क - 67 आयत (23)
अफ़सोस कि मुसलमान अपने कान, नाक और दिल का इस्तेमाल नहीं करता.  
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जीम 'मोमिन' निसारुल-ईमान

Thursday, 14 February 2019

खेद है कि यह वेद है - - -19


खेद  है  कि  यह  वेद  है  (19)

दभीति को उनके नगर से बाहर ले जाने वाले असुरों को इंद्र ने मार्ग में रोका एवं उनके प्रकाश मान आयुधों को आग में जला दिया. 
इसके पश्चात इंद्र ने उन्हें बहुत सी गायें घोड़े और रथ प्रदान किए. 
इंद्र ने यह सब सोमरस के नशे में किया.
सूक्त 15-4
ऐसी हरकतें कोई नशे के आलम में ही कर सकता है 
कि दुश्मन के प्रकाशमान आयुधों को जला दे 
फिर उसको गाएँ घोड़े और रथ दे.
इंद्र की इस हरकत को किसी ने नहीं देखा 
अलबत्ता श्लोक रचैता पंडित ने ज़रूर इसे भंग के नशे में लिखा होगा .
(ऋग्वेद / डा. गंगा सहाय शर्मा / संस्तृत साहित्य प्रकाशन नई दिल्ली )


जीम 'मोमिन' निसारुल-ईमान

Tuesday, 12 February 2019

खेद है कि यह वेद है - - -18


खेद  है  कि  यह  वेद  है  (18)

हे यज्ञ कर्म करता अध्वर्युजनो ! तुम जो चाहते हो वह इंद्र के लिए सोमरस देने पर तुरंत मिल जाएगा. 
याज्ञको ! हाथों द्वारा निचोड़ा हुवा सोम रस लाकर इंद्र के लिए प्रदान करो.
द्वतीय मंडल सूक्त 14-8 
यज्ञ आयोजन करने वालों को पंडित आश्वासन सोमरस के चढ़ावे से इंद्र प्रसन्न हो जाएगे. 
ध्यान रख्खें वह ओम्रस हाथों द्वारा निचोड़ा हो, न कि पैरों द्वारा अथवा मशीनों द्वारा.
धन्य है पोंगा पंडितो.
(ऋग्वेद / डा. गंगा सहाय शर्मा / संस्तृत साहित्य प्रकाशन नई दिल्ली )


जीम 'मोमिन' निसारुल-ईमान

Monday, 11 February 2019

सूरह तहरीम- 66 = سورتہ التحریم (मुकम्मल)

मेरी तहरीर में - - -
क़ुरआन का अरबी से उर्दू तर्जुमा (ख़ालिस) मुसम्मी
''हकीमुल उम्मत हज़रत मौलाना अशरफ़ अली साहब थानवी''का है,
हदीसें सिर्फ ''बुख़ारी'' और ''मुस्लिम'' की नक्ल हैं,
और तबसरा ---- जीम. ''मोमिन'' का है.
नोट: क़ुरआन में (ब्रेकेट) में बयान किए गए अलफ़ाज़ बेईमान आलिमों के होते हैं,जो मफ़रूज़ा अल्लाह के उस्ताद और मददगार होते हैं और तफ़सीरें उनकी तिकड़म हैं और चूलें हैं.

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सूरह तहरीम- 66 = سورتہ التحریم 
    (मुकम्मल)

देखो कि तुम अपनी नमाज़ों में क्या पढ़ते हो - - -
"ऐ नबी जिस चीज़ को अल्लाह ने आप के लिए हलाल किया है, 
आप उसे क्यूँ हराम फ़रमाते हैं. 
 अपनी बीवियों की ख़ुशनूदी हासिल करने के लिए?
और अल्लाह बख़्शने वाला है."
मुहम्मद ज़रा सी बात पर बीवियों को तलाक़ देने पर आ गए 
जिसे उनका अल्लाह हलाल फ़रमाता है बल्कि उन्हें समझाता है 
कि आप जनाब तलाक़ को क्यूँ हराम समझते हैं?
 हमारे ओलिमा डफ़ली बजाया करते है कि तलाक़ अल्लाह को सख़्त ना पसन्द है.
क़ुरआन में ऐसा कहीं है तो यहाँ पर तलाक़ इतना आसान क्यूँ?
दोहरा और मुतज़ाद हुक्म मुहम्मदी अल्लाह क्यूँ फ़रमाता रहता है?

"जब पैग़म्बर ने एक बात चुपके से फ़रमाई, फिर जब बीवी ने वह बात दूसरी बीवी बतला दी और पैग़म्बर को अल्लाह ने इसकी ख़बर दे दी. पैग़म्बर ने थोड़ी सी बात जतला दी और थोड़ी सी टाल गए. जतलाने पर वह कहने लगी, आपको किसने ख़बर दी? आपने फ़रमाया मुझको बड़े जानने वाले, ख़बर रखने वाले ने ख़बर दी." 
(यानी अल्लाह ने)

वाक़ेआ यूं है- मुहम्मद की एक बीवी ने उनको शहद पिला दिया था, 
उन्हों ने इस शर्त पर पिया कि दूसरी किसी बीवी को इसकी ख़बर न हो,
मगर उसने अपनी सवतन को बतला दिया कि उनको बात ज़ाहिर न करना.
दूसरी ने तीसरी को कहा आज राजा इन्दर आएँ तो कहना,
 क्या शहेद पिया है ? कि बू आ रही है? यही मैं भी कहूँगी. मज़ा आएगा.
मुहम्मद दूसरी के यहाँ गए तो उसने उनसे पूछा,"क्या शहेद पिया  है ? कि बू आ रही है? वह इंकार करते हुए टाल गए.
फिर तीसरी ने भी उनसे यही सवाल दोराय .क्या शहेद पिया  है ? कि बू आ रही है?"
मुहम्मद सनके कि जिसके यहाँ शहद पिया थ ये उसकी हरकत है सब बीवियों से उसने गा दिया .
बस इतनी सी बात पर पैग़म्बर अपनी बीवियों पर बरसे कि अल्लाह ने उनको सारी ख़बर देदी.
गोया अल्लाह ने उनकी बीवियों में चुगल खो़री  करता फिरा.
मैं मुहम्मदी अल्लाह को ज़ालिम, जाबिर, चाल चलने वाला, और मुंतक़िम के साथ साथ चुग़ल खो़र   भी कहता हूँ. जो अपने बन्दों को आपस में लड़ाता है. 
और वह अपनी सभी 9  बीवियों को तलाक़ देने की धमकी देने लगे. 

"ऐ दोनों बीवियों ! अगर तुम अल्लाह के सामने तौबा कर लो तो तुम्हारे दिल मायल हो रहे हैं और अगर पैग़म्बर के मुक़ाबिले में तुम दोनों कार रवाईयाँ करती रहीं तो याद रखो पैग़म्बर का रफ़ीक़ अल्लाह है और जिब्रील है और नेक मुसलमान हैं और इनके अलावा फ़रिश्ते मददग़ार हैं."

मुहम्मद दो बे सहारा और मजबूर औरतों के लिए अल्लाह की, फ़रिश्तों की और इंसानों की फ़ौज खड़ी कर रहे हैं, इससे ही इनकी कमज़ोरी का अंदाजः किया जा सकता है.

"अगर पैग़म्बर तुम औरतों को तलाक़ दे दें तो उसका परवर दिगार बहुत जल्द तुम्हारे बदले इनको तुम से अच्छी बीवियाँ दे देगा जो इस्लाम वालियाँ, ईमान वालियाँ, फ़रमा बरदारी करने वालियाँ, तौबा करने वालियाँ, इबादत करने वालियाँ और रोजः रखने वालियाँ होंगी. कुछ बेवा और कुछ कुंवारियाँ होंगी."
ऐसे रसूल पर ग़ैरत वालियों की लअनत .

"ऐ ईमान वालो तुम अपने आप को और अपने घरों को आग से बचाओ जिसका ईंधन आदमी और पत्थर है, जिस पर तुन्दख़ू फ़रिश्ते हैं, जो अल्लाह की नाफ़रमानी नहीं करते, किसी बात में, जो उनको हुक्म दिया जाता है और जो कुछ उनको हुक्म दिया जाता है उसको बजा लाते है."

मुसलमानों! क्या ऐसी बातें तुम्हारी इबादत और तिलावत के लायक़ हैं जो दीनी वज्द में आकर तुम बकते हो. बड़े शर्म की बात है. 
सोचो, अल्लाह की बात में कोई बात तो हो.

"ऐ नबी कुफ़्फ़ार से और मुनाफ़िक़ीन से जेहाद कीजिए और उनका ठिकाना दोज़ख है और बुरी जगह है"

किसी इंसान का ख़ून किसी हालत में भी जायज़ नहीं हो सकता, 
चाहे वह कितना बड़ा मुजरिम ही क्यूँ न हो, 
क़ातिल ही क्यूँ न हो. 
क़त्ल के मुजरिम को अल्म नाक ज़िन्दगी गुज़ारने की सज़ा हो 
ताकि वह आख़िरी साँसों तक सज़ा काटता ही मरे मगर हाँ !
जेहादियों को देखते ही गोली मार देनी चाहिए जो 
इंसानी ख़ून के बदले सवाब पाते हों.

"अल्लाह काफ़िरों के लिए नूह की बीवी और लूत कि बीवी का हाल बयान फ़रमाता है. वह दोनों हमारे ख़ास में से ख़ास दो बन्दों के निकाह में थीं. सो उन औरतों दोनों बन्दों का हक़ ज़ाया किया. दोनों नेक बन्दे अल्लाह के मुक़ाबिले में उनके ज़रा भी काम न आ सकेऔर उन दोनों औरतों को हुक्म हो गया और जाने वालों के साथ तुम भी दोज़ख में जाओ."

अल्लाह का मुक़ाबिला किस्से हुवा था? ऐ पागल क्या बक रहा है. ?
कमज़ोर इंसान ! 
अपनी बीवियों को किस नामर्दी के साथ धमका रहा है.
(सूरह तहरीम- 66)
जीम 'मोमिन' निसारुल-ईमान

Sunday, 10 February 2019

खेद है कि यह वेद है - - -1६

खेद  है  कि  यह  वेद  है  (१६-१७)

हे  अध्वर्युजनो ! इंद्र के लिए सोम ले आओ एवं चमचों के द्वारा मादक सोम को अग्नि में डालो. इस सोम को पीने के लिए वीर इंद्र सदा इच्छुक रहते हैं. तुम काम वर्धक इंद्र के निमित्त सोम दो, क्यों कि वह इसे चाहते हैं.
द्वतीय मंडल सूक्त 14-1 
कामुक इंद्र देव के लिए शराब की महिमा गान ?. 
इंद्र भगवान् की चाहत काम उत्तेजक सोमरस ??. 
भगवान् और मानव से इनकी फरमाइश??? 
जिन्हें गर्व हिंदुत्व का है वह कहाँ हैं ?

जल धारण करने वाली नदियाँ आपस में मिलकर चारो ओर बह रही हैं एवं जल के स्वामी सागर को भोजन पहुँचती हैं, नीचे की ओर बहने वाले जलों का रास्ता एक सामान है, जिसे इंद्र ने प्राचीन काल में ये सब काम किए हैं, वह प्रशंशा के योग्य हैं.
द्वतीय मंडल सूक्त 13-2 
अर्थात विश्व की सारी नदियाँ राजा इन्दर की परिश्रम के परिणाम स्वरूप हैं. 
क्या हम अपने बच्चों को यह शिक्षा  और ज्ञान दे सकते है? 
योरोप के सभ्य समाज के लोग वेदों को पढ़कर हिनुस्तानियों को क्या दर्जा देंगे?
(ऋग्वेद / डा. गंगा सहाय शर्मा / संस्तृत साहित्य प्रकाशन नई दिल्ली )
जीम 'मोमिन' निसारुल-ईमान

Wednesday, 6 February 2019

सूरह तलाक़- 65 = سورتہ الطلاق (मुकम्म

मेरी तहरीर में - - -
क़ुरआन का अरबी से उर्दू तर्जुमा (ख़ालिस) मुसम्मी
''हकीमुल उम्मत हज़रत मौलाना अशरफ़ अली साहब थानवी''का है,
हदीसें सिर्फ ''बुख़ारी'' और ''मुस्लिम'' की नक्ल हैं,
और तबसरा ---- जीम. ''मोमिन'' का है.
नोट: क़ुरआन में (ब्रेकेट) में बयान किए गए अलफ़ाज़ बेईमान आलिमों के होते हैं,जो मफ़रूज़ा अल्लाह के उस्ताद और मददगार होते हैं और तफ़सीरें उनकी तिकड़म हैं और चूलें हैं.

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सूरह तलाक़- 65 = سورتہ الطلاق
(मुकम्मल)

मैं फिर इस बात को दोहराता हूँ कि मुस्लमान समझता है कि इस्लाम में कोई ऐसी नियमावली है जो उसके लिए मुकम्मल है, 
ये धारणा  बिलकुल बे बुन्याद है, बल्कि क़ुरआन के नियम तो मुसलामानों को पाताल में ले जाते हैं. मुसलामानों ने क़ुरआनी निज़ाम ए हयात को कभी अपनी आँखों से नहीं देखा, बस कानों से सुना भर है. इनका कभी क़ुरआन का सामना हुवा है, तो तिलावत के लिए. मस्जिदों में कुवें के मेंढक मुल्ला जी अपने ख़ुतबे में जो उल्टा सीधा समझाते हैं, ये उसी को सच मानते हैं. 
जदीद तअलीम और साइंस का स्कालर भी समाजी लिहाज़ में आकर जुमा जुमा नमाज़ पढ़ने चला ही जाता है. इसके माँ बाप ठेल ढकेल कर इसे मस्जिद भेज देते हैं, वह भी अपनी आक़बत की ख़ातिर. 
मज़हब इनको घेरता है कि हश्र के दिन अल्लाह इनको जवाब तलब करेगा 
कि अपनी औलाद को टनाटन मुसलमान क्यूँ नहीं बनाया ? 
और कर देगा जहन्नम में दाख़िल. 
क़ुरआन में ज़मीनी ज़िन्दगी के लिए कोई गुंजाईश नहीं है, 
जो है वह क़बीलाई है, निहायत फ़रसूदा. 
क़ब्ल ए इस्लाम, अरबों में रिवाज था कि शौहर अपनी बीवी को कह देता था कि "तेरी पीठ मेरी माँ या बहन की तरह हुई," 
बस उनका तलाक़ हो जाया करता था. 
इसी तअल्लुक़ से एक वक़ेआ पेश आया कि कोई ओस बिन सामत नाम के शख़्स  ने गुस्से में आकर अपनी बीवी हूला को तलाक़ का मज़कूरा जुमला कह दिया. 
बाद में दोनों जब होश में आए तो एहसास हुआ कि ये तो बुरा हो गया. 
इन्हें अपने छोटे छोटे बच्चों का ख़याल आया कि इनका क्या होगा? 
दोनों मुहम्मद के पास पहुँचे और उनसे दर्याफ़्त किया कि उनके नए अल्लाह इसके लिए कोई गुंजाईश रखते हैं ? कि वह इस आफ़त ए नागहानी से नजात पाएँ ? 
मुहम्मद ने दोनों की दास्तान सुनने के बाद कहा तलाक़ तो हो ही गया है, 
इसे फ़रामोश नहीं किया जा सकता. 
बीवी हूला ख़ूब रोई पीटी और मुहम्मद के सामने गींजी कि नए अल्लाह से कोई हल निकलवाएँ. फिर हाथ उठा कर सीधे अल्लाह से वह मुख़ातिब हुई और जी भर के अपने दिल की भड़ास निकाली, 
तब जाकर अल्लाह पसीजा और मुहम्मद पर वह्यी आई. 
इसी रिआयत से इस सूरह का नाम सूरह तलाक़ पड़ा, 
वैसे होना तो चाहिए था सूरह हूला. 
अब देखिए और सुनिए अल्लाह के रसूल पर आने वाली वहियाँ यानी ईश वाणी - - -
" ए पैग़म्बर ! 
जब तुम लोग औरतों को तलाक़ देने लगो तो उनको इद्दत से पहले तलाक़ दो और तुम इद्दत को याद रखो और अल्लाह से डरते रहो जो तुम्हारा रब है. इन औरतों को इनके घरों से मत निकालो और न वह औरतें ख़ुद निकलें, मगर हाँ अगर कोई खुली बे हयाई करे तो और बात है. ये सब अल्लाह के मुक़र्रर किए हुए एहकाम हैं." 

"फिर जब औरतें इद्दत गुज़रने के क़रीब पहुँच जाएँ, इनको क़ायदे के मुवाफ़िक़ निकाह में रहने दो या क़ायदे के मुवाफ़िक़ इन्हें रिहाई देदो और आपस में दो मुअत्बर शख़्सों को गवाह कर लो." 

"तुम्हारी बीवियों में जो औरतें हैज़ (मासिक धर्म) आने से मायूस हो चुकी हैं, अगर तुमको शुब्हः है तो इनकी इद्दत तीन महीने है और इसी तरह जिनको हैज़ नहीं आया और हामला औरतों का इनके हमल का पैदा हो जाना है. "
"जो शख़्स अल्लाह और उसके रसूल की पूरी इताअत करेगा, अल्लाह तअला उसको ऐसी बहिश्तों में दाख़िल कर देंगे जिसके नीचे नहरें जारी होंगी, हमेशा हमेशा इनमें रहेंगे. ये बड़ी कामयाबी है." 

अल्लाह की आकाश वाणी कुछ समझ में आई? 
पता नहीं इन आयतों से ओस बिन सामत और हूला बी की बरबादियों का कोई हल निकला या नहीं, 
इनको रोजों से नजात तो नहीं मिली अलबत्ता नमाज़ें इनके गले और पड़ गईं. कहीं कोई हल तो नाज़िल नहीं हुवा . हाँ बे सिर पैर की बातें ज़रूर नाज़िल हो गईं. 
इस अल्लाही एहकाम में चौदह सौ सालों से माहरीन दीनयात ज़रूर मुब्तिला है कि वह आपस में मुख़्तलिफ़ रहा करते हैं. 
तलाक़ के बाद शौहर का घर बीवी के लिए अपना कहाँ रह जाता है कि वह वहाँ जमी रहे और इद्दत के दौरान शौहर उसके साथ मनमानी करता रहे. 
ग़ौर तलब है कि मुहम्मद ने हमेशा मर्दों को ही इंसान का दर्जा दिया है. 
ये सारी मुहम्मदी नाज़ेबगी आज रायज नहीं है, पहले रही होगी. 
इसको सुधार कर ही शरअ को एक पैकर दिया गया है 
जो कि दर अस्ल एहकाम ए इलाही में इंसान की मुदाख़लत का नतीजा है, 
वर्ना अल्लाह की गुत्थी और भी उलझी हुई होती. 
अल्लाह की बातें पहले भी मुज़ब्ज़ब थीं और आज भी मुज़ब्ज़ब हैं. 
जैसे इस्लामी शरअ क़ुरआन को तराश ख़राश कर इस्लाम के बहुत दिन बाद बनाई गई, वैसे ही आज भी इसमें तबदीली की ज़रुरत है और इतनी ज़रुरत है कि आज इस्लाम की खुल कर मुख़ालिफ़त की जाए. 
ख़ास कर औरतों के हक़ में इस्लाम निहायत ज़ालिम ओ जाबिर है, 
अफ़सोस कि यही औरतें इस्लाम की ज़्यादः पाबंद है. 
वह सुब्ह उठ कर क़ुरआन की तिलावत को मख्खियों की तरह भिनभिनाने लगती हैं. वह अपने ही ख़िलाफ़ उतरी अल्लाह की आयातों पर मर्दों से ज़्यादः ईमान रखती है. इनको इनका अल्लाह अक़्ल-सलीम दे.
50% की ये इंसानी आबादी अगर जग जाए तो मुसलामानों की दुन्या बदल सकती है.
कोई हूला नहीं पैदा हो रही कि अल्लाह को इन नाक़िस आयातों पर अल्लाह को तलब करे. 
तमिल नाडू की कुछ मुस्लिम औरतें अपनी अलग एक मस्जिद बना कर उसमें पेश इमामी ख़ुद करती है, इससे मर्दों का गलबा उन पर से उठा है. 
इसे इनकी बेदारी कहें या नींद? 
आजतक वह कठ मुल्लों की गिरफ़्त में थीं, अब वह कठ मुल्लियों की गिरफ़्त में होंगी. ख़वातीन की मस्जिद में भी मुहम्मदी अल्लाह के क़ानून क़ायदे होंगे. 
क्या इस मस्जिद में उन क़ुरआनी आयतों का बाई काट भी किया जाएगा जो औरतों को रुसवा करती हैं. 
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जीम 'मोमिन' निसारुल-ईमान

Tuesday, 5 February 2019

खेद है कि यह वेद है - - -15


खेद  है  कि  यह  वेद  है  (15)

हे मनुष्यों ! जिसने चंचल धरती को दृढ किया, क्रोधित पर्वतों को नियमित किया, विशाल आन्तरिक्ष को बनाया और आकाश को स्थिर किया, वही इंद्र है.
द्वतीय मंडल सूक्त 12-2 
वाह ! वाह !! वाह!!!
 गोया राजा इन्दर, मिनी अल्लाह मियाँ भी हुए. धन्य है पंडित जी.
*
हे मनुष्यों ! जो सोम रस निचोडने वाले यजमान, पुरोडाश पकाने वाले व्यक्ति, 
स्तुति रचना करने वाले एवं पढने वाले की रक्षा करता है. हमारा अन्न सोम एवं स्तोत्र जिसे बढ़ाने वाले हैं, हमारे इंद्र हैं. 
द्वतीय मंडल सूक्त 12-14 
पुरोहित जी मदक भंग को कूटने, पीसने, भिगोने और निचोड़ने वाले यजमान (मेज़बान) को और पुरोडाश (पकवान) बनाने वाले बावरची के उत्थान का भी ख़याल रखते हैं. उनके भले में ही सब का भला है.


जीम 'मोमिन' निसारुल-ईमान